उत्तरी अटलांटिक मार्ग:: विश्व का सर्वाधिक व्यस्त एवं महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यह जलमार्ग उत्तरी अमेरिका के विकसित पूर्वी भागों तथा पश्चिमी यूरोप की औद्योगिक देशों को जोड़ता है ।यह मार्ग पश्चिमी यूरोप के मुख्य बंदरगाह ग्लासगो, लिवरपूल ,साउथहैंपटन ,लंदन, राटर डम, लिस्बन को उत्तरी अमेरिका के पूर्वी किनारे के पत्तनों क्यूबेक, मॉन्ट्रियल, हैलीफैक्स, बॉस्टन, न्यूयॉर्क आदि से जोड़ता है।
भूमध्य सागर तथा हिंदमहासागर का सामुद्रिक जलमार्ग::
यह जलमार्ग भी विश्व का एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है ।क्योंकि यह पश्चिमी यूरोप की औद्योगिक देशों को भूमध्य सागर लाल सागर एवं हिंद महासागर से होकर पूर्वी अफ्रीका दक्षिण एशिया एवं सुदूर पूर्व के देशों से जोड़ता है। इस मार्ग पर पोर्ट सईद अदन, मुंबई ,कोच्चि, कोलंबो आज बड़े पत्तन में स्थित है।
केप का जलमार्ग:: यह जलमार्ग स्वेज नहर से पहले पश्चिमी यूरोप को सुदूर पूर्व ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड से जोड़ता था। अभी भी इस मार्ग से पश्चिमी अफ्रीका के देशों दक्षिणी अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से व्यापार किया जाता है।
दक्षिणी अटलांटिक महासागर का जल मार्ग::
यह जलमार्ग यूरोपीय देशों को ब्राजील, अर्जेंटीना तथा उरुग्वे से जोड़ता है।
स्वेज नहर::: स्वेज नहर मिस्र से भूमध्य सागर एवं लाल सागर को मिलाने के लिए बनाया गया है ।एक मानव कृत जलमार्ग है। यूरोप पूर्वी अफ्रीका दक्षिण एवं दक्षिणी पूर्वी एशिया सुदूर पूर्व तथा आस्ट्रेलिया को जोड़ने वाला यह सबसे छोटा जलमार्ग है लेकिन यह नगर विश्व की सबसे बड़ी जहाजी नगर है। इस नहर को बनाने का कार्य वर्ष 1854 में एक फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेंड दा लिपिक को सौंपा गया और वर्ष 1869 में यह नहर बनकर तैयार हुई थी ।यह 168 किलोमीटर लंबी तथा इसकी अधिकतम चौड़ाई 365 मीटर और न्यूनतम चौड़ाई 60 मीटर है। नहर की औसत गहराई 16.15 मीटर है।