सौरमंडल से प्लूटो के निष्कासन के बाद यह सबसे छोटा ग्रह है। जिसके पास कोई उपग्रह नहीं है ।यह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है। सूर्य से इसकी दूरी 5.8 करोड़ किलोमीटर है। इसका व्यास 4880 किलोमीटर तथा घनत्व 5.5 है। यह सौरमंडल का सर्वाधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है जो 48 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय( 88 दिन) में पूरा कर लेता है। इसकी अक्षीय अवधि 58.65 दिन है।
यह सूर्य से निकलने के दो घंटा पहले दिखाई पड़ता है ।तथा सूर्यास्त के कुछ पहले अस्त होता है इसकी प्राचीन विद्वान इसे दो ग्रह समझते थे प्रातः उदय वाले बुध को अपोलो तथा शाम वाले ग्रह को मरकरी कहते थे। शुक्र के अलावा बुध को भी भोर और सायम का तारा कहा जाता है बुध प्रातः एवं सायं के तारे के रूप में वर्ष में तीन बार दिखाई देता है ।जिसका कारण इसकी साइनाइडीक अवधि का 116 दिन का होना है ।अधिक ताप एवं कम पलायन वेग के कारण बुद्ध पर वायुमंडल का अभाव है।
इसके चारों तरफ हाइड्रोजन का एक क्षीण आवरण है ।विरल हाइड्रोजन के कारण सौरभ वनों का ग्रह के साथ अंतर्क्रिया है वायुमंडल के अभाव के कारण बुध पर जीवन संभव नहीं है। क्योंकि यहां दिन अधिक गर्म व राते बर्फीली होती हैं। इसका तापांतर सभी ग्रहों से अधिक 560 डिग्री सेल्सियस है। बुद्ध का 1 दिन पृथ्वी के 90 दिन के बराबर होता है ।इसका द्रव्यमान पृथ्वी का एक बटे 18 है इसका क्रोड लोहे का बना होता है। पृथ्वी और सूर्य के मध्य से बुद्ध के गुजरने को बुद्ध का पर गमन कहा जाता है 7 मई 2003 को एक खगोलीय घटना संपूर्ण भारत में देखी गई थी ।13 नवंबर 2032 को बुधवार पारगमन की घटना संपूर्ण भारत में देखी जा सकेगी।
एक सदी में 13 बार यह खगोलीय घटना घटती है ।बुध अपने अक्ष पर 7 डिग्री झुका है ।सूर्य के केंद्र से एक ऐसी काल्पनिक रेखा गुजरती है जो सभी ग्रहों की कक्षाओं को काटती है बुद्ध और पृथ्वी की कक्षा जिस बिंदु पर इस रेखा को काटती है उसे संक्रांति बिंदु कहते हैं। सूर्य के परित परिक्रमा करते हुए जब पृथ्वी और बुध एक ही समय पर इस बिंदु के निकट आ जाते हैं तब बुध पारगमन की खगोलीय घटना घटती है।