भारतीय शिक्षा प्रणाली पर निबंध

हमारी शिक्षण संस्थानो को अपने इस दृष्टिकोण को बदलना होगा। तभी हम अपनी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार कर सकते है। हमें छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कला, खेल और अन्य गतिविधियों को भी महत्व देना होगा। क्योकि मनुष्य को जीवन में सफल होने के लिए केवल शिक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।गांधी जी ने शिक्षा का अर्थ समझाते हुए कहा था कि, शिक्षा यानि बच्चों मे शारीरिक, मानसिक और नैतिक शक्तियों का विकास करना है। न की उन्हें किताबी कीड़ा बनाना। लेकिन भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली को देखते हुए हमें इसमें सुधार करने की बहुत आवश्यकता है। इसके लिए हमें सबसे पहले छात्रों के कौशल विकास पर ध्यान देना होगा और उनके अंकों और रैंक को महत्व देना बंद करना होगा। हमें छात्रो की संज्ञानात्मक और रचनात्मक सोच को कैसे बढ़ाए इसके बारे में सोचना होगा।
इसके अलावा हमें किसी भी विषय की गहरी समझ विकसित करने के लिए उसका व्यावहारिक ज्ञान बहुत जरूरी है। परंतु भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली सैद्धांतिक ज्ञान पर केंद्रित है। हमें इसे बदलना चाहिए और व्यावहारिक ज्ञान को अपनाना चाहिए। इसके साथ-साथ हमें अपने पाठ्यक्रम को भी समय के अनुसार बदलना चाहिए, क्योकि हमारा पाठ्यक्रम दशकों से समान है। जैसे वर्तमान में कंप्यूटर का युग है, इसलिए आज के समय में कंप्यूटर विषय स्कूलों में मुख्य विषयों में से एक होना चाहिए। देश के छात्रों को अच्छी शिक्षा देने के लिए अच्छे शिक्षण स्टाफ का होना भी बहुत जरूरी है।
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