डायनामाइट ( DYNAMITE) -
इसका आविष्कार सन् 1867 ई.में अल्फ्रेड नोबेल ने किया।
यह नाइट्रोग्लिसरीन को किसी अक्रिय पदार्थ जैसे लकडी के बुरादे में अवशोशित करके बनाया जाता है
जिलेटिन डायनामाइट मे नाइट्रो सेलुलोज की मात्रा उपस्थित रहती है। इसके विष्फोट के समय उत्पन्न गौषो का आयतन बहुत अधिक होता है।
आधुनिक डायनामाइट में नाइट्रोग्लिसरीन की जगह सोडियम नाइट्रेड का उपयोग किया जाता है।
ट्राइ नाइट्रो टाल्विन ( T.N.T )
यह टाल्विन (C6H5CH3)के साथ सान्द्र H2SO4 एंव HNO3 कि क्रिया से बनाया जाता.है इसकी विस्फोट की गति 6900 मी. /सेकण्ड़ है।
ट्राई -नाइट्रो-ग्लिसरीन (T.N.G)
यह एक रंगहीन तैलीय द्ररव है। इसे नोवल का तेल भी कहा जाता है
यह डायनामाइट बनाने के काम आता है।
यह सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल व.सान्द्र नाइट्रिक अम्ल की ग्लिसरीन के अभिक्रिया करके बनाया जाता है।