चाणक्य का नाम विष्णु गुप्त था। चाणक्य नीति निपुण राजनीतिक शास्त्र प्रांगण कूटनीतिज्ञ महापंडित थे। सड़क नामक गांव में पैदा होने के कारण इन्हें चाणक्य तथा कुटिल गोत्र के कारण कौटिल्य कहा गया। तक्षशिला में उन्होंनेअपनी शिक्षा पूरी की थी। परंतु वह उम्र तथा क्रोधी स्वभाव के थे। वह घूमते हुए पाटलिपुत्र पहुंचे जहां उन दिनों घनानंद राज्य करते थे वह दान शाला में चाणक्य का प्रबंधक बना दिया गया। परंतु कट स्वभाव के कारण उसका अपमान करके उसे वहां से निकाल दिया गया चाणक्य ने इस अपमान का प्रतिशोध लेने तथा नंद वंश का विनाश करने की सौगंध खा ली थी। उसके बाद चाणक्य की भेंट चंद्रगुप्त मौर्य से हुई चाणक्य ने चंद्रगुप्त को अपनी सौगंध बताइए तत्पश्चात उसने सेना एकत्रित करके चंद्रगुप्त की मदद से नंद वंश का विनाश कर के ही चैन की सांस ली चाणक्य ने चंद्रगुप्त का राज्याभिषेक करके उसे मगध का सम्राट बना दिया चंद्रगुप्त ने चाणक्य को प्रधानमंत्री के पद पर सुशोभित किया। चाणक्य ने अर्थशास्त्र नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा।
जिसे 15 भागों तथा 180 विभागों में विभाजित किया गया इसमें से लगभग 6000 श्लोक हैं।