भारतीय वित्तीय संरचना पर एक नजर

भारतीय वित्तीय संरचना

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय बैंक अपने खराब ऋण (Bad Loan) के कारण दबाव में रहेंगे।
  • केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए Stress tests से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में खराब ऋण में वृद्धि जारी रहेगी, जबकि पूंजी पर्याप्तता में कमी आएगी।
  • वर्तमान नीति के तहत वित्तीय क्षेत्र में वसूली के चार घटकों में से पहले तीनों पर स्वाभाविक रूप से ध्यान दिया जा रहा है - जो कि वर्णित है

          1. मान्यता,

          2. संकल्प,

          3. पुनर्पूंजीकरण और

          4. सुधार

  • वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली लोकसभा की एक समिति ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम, वित्त सचिव हंसमुख अधिया, डिप्टी आरबीआई के गवर्नर महेश कुमार जैन और आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग को बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते एनपीए के लिए समन जारी किया था।

एनपीए के बारे में जान लें

  • असल में एनपीए का पूरा नाम Non-performing asset है और अगर साधारण भाषा में बात करें तो यह ऐसी सम्पति होती है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं होता है और npa in banks की बात करें तो यह loans के बारे में होता है। बैंक्स के लिए एनपीए को साधारण तरीके से हम इस तरह से समझ सकते है कि अगर बैंक से कोई बड़ा लोन लेता है और बैंक किसी भी कारण से उसे वसूल पाने में अक्षम होता है, तो यह एनपीए की श्रेणी में आ जाता है और इसे खराब ऋण (Bad Loan) भी कह सकते है, क्योंकि उन्हें रिकवर करने की सम्भावना बेहद कम होती है।

भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट

  • वित्तीय स्थिरता पर नवीनतम भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2019 तक बैंकिंग प्रणाली में बैड लोन मार्च 2018 में 11.6% से 12.2% तक बढ़ जाएगा।
  • आरबीआई ने अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में यह भी कहा है कि इनके जीएनपी अनुपात बुरे स्तर पर पहुंच कर मार्च 2018 के 21 प्रतिशत से मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक 22.3 प्रतिशत पर पहुंच सकता है।
  • कुछ दिन पहले वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नियमन के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक को स्वायत्तता देने और उसकी ‘कम शक्तियों’ पर बातचीत के लिए तैयार है।
  • गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद सरकारी बैंकों पर कड़ी निगरानी रखने में असफल रहने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल ने हाल ही में कहा था कि सरकारी बैंकों के नियमन के संबंध में रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
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