पृथ्वी का वह भाग जो कठोर सालों से निर्मित है।स्थल मंडल के अंतर्गत आता है ।पृथ्वी की ऊपरी परत जिस पर हम निवास करते हैं वह भू पृष्ठ अथवा भूपर्पटी कहलाती है। भूपर्पटी पर सर्वाधिक अवसादी सहयोग का विस्तार है इसकी महाद्वीप पर मोटाई लगभग 32 किलोमीटर तक समुद्र में लगभग 8 मीटर है। स्थल मंडल का विस्तार पृथ्वी के लगभग 29.2% भाग पर है। इसका क्षेत्रफल लगभग चार करोड़ 9900000 किलोमीटर है ।अनेक खनिज लवणों का मिश्रण है। स्थलमंडल की संरचना तीन परतों के रूप में हुई है। सियाल ,सीमा, निफे ,सियाल में सिलिका तथा एलुमिनियम की मात्रा अधिक होती है। इसी आधार पर इस परत का नामकरण हुआ है। महाद्वीपों की भूख पृष्ठ का निर्माण इन्हीं पदार्थ द्वारा हुआ है ।इस परत का औसत घनत्व 2.9 तथा गहराई 50 किलोमीटर से 500 किलोमीटर पाई जाती है , सिमा सियाल सेनीचे वाली परत को सिमा कहते हैं ।ऊपरी परत के ठीक नीचे पाई जाने वाली परत को मंडल कहते हैं।इसमें सिलिका तथा मैग्नीशियम का अधिक है। ज्वालामुखी को जन्म देने वाली यहीं पर है इस परत को करोड के नाम से भी जाना जाता है। इसकी परत मुख्यतः लोहा जैसी कठोर धातु से बनी है इसी कारण इसका नाम निफे रखा गया है। उच्च तापमान तथा अत्यधिक दबाव के कारण तलाक तरल अथवा प्लास्टिक अवस्था में पाई जाती है। लोहे और निकिल की प्रधानता के कारण ही भूगर्भ चुंबकीय शक्ति इसके द्वारा प्रकट होती है।