गांधीजी 1915 के प्रारंभ में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। दक्षिण अफ्रीका रचनात्मक प्रयोगों एवं अनुभव ने उनके व्यक्तित्व में अनेक सकारात्मक परिवर्तन दिए थे ।जून 1914 तक दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने भारतीय विवाहों को मान्यता प्रदान कर दी। याधापी दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद एवं तत्संबंधी शोषड निरंतर जारी रहा ।वामपंथी इतिहासकारों का कहना है कि गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में आंशिक विजय प्राप्त कर है लौटे थे । याथपी गांधीजी की दक्षिण अफ्रीका में आंशिक विजय ही रही । किन्तु दक्षिण अफ्रीका के प्रयोगों के कारण उन्हें भारत में भी आंशिक विजय ही रही किन्तु दक्षिण अफ्रीका प्रयोगों के कारण उन्हें भारत में भी प्रसिद्ध प्राप्त हुई थी । गांधीजी इससे पूर्व ही बीच बीच ।मेंभारत अवश्य आते थे । किन्तु अब वे पूर्ण रूप से भारत आ चुके थे भारत आने के उपरांत अपने राजनीतिक गुरु गोखले की सलाह मान के उन्होंने देश की वास्तविक इस्थियी से परिचित होने के लिए एक दो वर्ष शांति पूर्वक बिताने का निर्णय लिया उन्होंने अहमदाबाद। के निकत साबरमती पास अपना ऐतिहासिक आश्रम स्थापित किया भारत में अगले तीन वर्षों तक गांधी जी निरंतर स्थानीय अन्यायो के विरूद्ध आवाज़ उठाते रहे राजनीतिक क्षेत्र में उनका सर्वप्रथम महत्वपूर्ण कार्य अंग्रेज़ो के उपनिवेशों के सहायता के लिए भारतीय मजदूरों की भर्ती किए जाने के गिर मिटिया प्रथा के विरूद्ध आवाज़ उठाना एवं उसे पूरी तरह से समाप्त करना था । गांधीजी ने भारत की राजनीति में इस समय एक महत्वपूर्ण परिवर्तन यह किया की कांग्रेस के अन्य नेताओं विपरीत स्थानीय स्तर के मुद्दे उठाना अर्थात वे नीचे से राजनीति को सफल बना कर उसे अखिल भारतीय स्वरूप प्रदना करना चाहते थे । जब की कांग्रेस की परंपरागत पद्धति यह थी कि अखिल भारतीय स्तर के स्पष्ट मुद्दों को उठाना एवं उन पर कार्य करने। का प्रयास करना प्रसिद्धि इतिहासकारों ज्योधित ब्राउन इस सम्बन्ध में सब कांट्रेक्टर्स शब्द का प्रयोग करते है। उनका कहना है की अपने इन राजनीतिक वर्षों के दौरान महात्मा गांधी ने अनेक सब कांट्रेक्टर्स को ही विकसित किया जैसे गुजरात में वल्लभ भाई पटेल , महादेव देसाई, इंदु लाल यागमिक ,चंपारण राजेन्द्र प्रशाद ,अनुग्रह नारायण सिंह आदि।।