श्री शिव प्रसाद सिंह द्वारा कृत कर्मनाशा की हार कहानी एक सामाजिक कहानी है कर्मनाशा नदी रूढ़ियों का प्रतीक है इस कहानी में प्रगति शीलता का समर्थन तथा रोगियों का विरोध किया गया है कुलदीप ब्राह्मण जाति से तथा फुल मत मल्लाह जाति से हैं फुल मत एक विधवा होती हैं दोनों को प्रेम पास में बाधा देव कुलदीप का बड़ा भाई भैरव पांडे उन्हें डांटता है डर के कारण कुलदीप गांव छोड़कर भाग भाग जाता है दोनों के प्रेम के प्रतिफल के रूप में फुल मत एक बच्चे को जन्म देती है गांव में यह प्रचार किया जाता है कि कर्मनाशा की विनाशकारी बाढ़ फुल मत के पाप कर्मों का परिणाम है पंचायत निर्णय देती है कि मां तथा अवैध संतान को कर्मनाशा नदी की उन पर चढ़ा दिया जाए ऐसे समय पर भैरव पांडे इसका विरोध करता है तथा फुल मत को अपने भाई कुलदीप की पत्नी घोषित कर आता है कहानी का कथानक असंगठित है आरंभ मध्य तथा अंत रोचक है कौतूहल तथा रोचक घटना प्रसंग कथावस्तु के विशेष गुण हैं कर्मनाशा की हार कहानी के पात्र सामान्य ग्रामीण लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं भैरव पांडे कुलदीप फूलमती गांव का मुखिया आदि कहानी के विशिष्ट पात्र हैं पात्रों में प्रगतिशील विचारधारा वाले पात्र तथा रूढ़ियों और अंधविश्वास में जकड़े ढोंगी पात्र 2 वर्ग है कुलदीप 16 वर्षीय भावुक नवयुग है और फूल मत विधवा नवीन मेष राशि तथा मुखिया कोसले बाजों के प्रतीक हैं भैरव पांडे आदर्श वादी तथा प्रगतिशील विचारों वाला अधेड़ पंडित है पात्र सजीव है भैरव का चरित्र बड़े सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है या कथावाचक ब्राह्मण किए जाने का विरोध इन शब्दों में करता है इन शब्दों में करता है कर्मनाशा बच्चे और कर्मनाशा बच्चे और एक अबला की बलि देने से नहीं रुकेगी उसके लिए तुम्हें पसीना बहाकर बांधों को ठीक करना होगा इस प्रकार पात्र योजना तथा चरित्र चित्रण की दृष्टि से प्रस्तुत कहानी पर्याप्त सफल है।