हिंद महासागर की धाराएं

हिंद महासागर की धाराओं में प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरीय धाराओं का क्रम कुछ परिवर्तन के साथ पाया जाता है हिंद महासागर की धाराओं पर स्थलमंडल तथा मानसूनी हवाओं का पर्याप्त प्रभाव रहता है उत्तरी हिंद महासागर में उत्तर पूर्व तथा दक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाओं के कारण धाराओं की दिशा में वर्ष में दो बार परिवर्तन होता है जबकि दक्षिण में हिंद महासागर में धाराओं का निश्चित क्रम जाता है शीत ऋतु में उत्तरी विषुवतीय धारा उत्तरी पूर्वी मानसून पवनों के घर्षण द्वारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होने लगती है इसका को उत्तर पूर्वी मानसून अपवाह कहते हैं ग्रीष्म ऋतु में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के प्रभाव से जल का प्रवाह पश्चिम से पूर्व की ओर होने लगता है और दक्षिण पश्चिम मानसून अपवाह नामक धारा का जन्म होता है

दक्षिणी विषुवतीय धारा - महासागरों की तरह महासागर में भी दक्षिणी भूमध्यरेखीय धारा भूमध्य रेखा के समीप दक्षिण में पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है अंगुलीहास धारा हिंद महासागर में प्रवाहित होने वाली गर्म जलधारा है 

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