गहरी चोट लगने जल जाने लंबी बीमारी आदि के कारण शरीर में रुधिर की अत्यधिक कमी होने पर रोगी की मृत्यु हो सकती है प्राचीन काल से वैज्ञानिक दूसरे स्वस्थ मनुष्य या जंतुओं का रुधिर चढ़ाकर ऐसे रोगियों को बचाने का प्रयास करते रहते हैं इसे ब्लड ट्रांसफॉरमेशन कहते हैं कुछ रोगी तो इसमें बज जाते थे लेकिन अधिकांश के लिए यह पिछली सदी के अंत तक घातक सिद्ध होता रहा और वैज्ञानिक इस बात के कारणों की खोज करते रहे सन 1900 में नोबेल पुरस्कार विजेता कार्ल लैंडस्टेनर ने पता लगाया कि सभी मनुष्यों का रुधिर एक समान नहीं होता रुधिर आधान की सफलता के लिए आवश्यक है कि रुधिर दान देने वाले अर्थात दाता का रुधिर लेने वाले रोगी अर्थात प्राप्त के रुधिर के समान हो अन्यथा रोगी के रुधिर में पहुंचते ही दाता के रुधिर के लाल RBC,s परस्पर बड़े बड़े समूहों में चिपकने लगते हैं इस RBC,s का विश्लेषण कहते हैं इससे रोगी की शीघ्र मृत्यु हो जाती है