यह अधिनियम सरकार द्वारा इसलिए लाया गया क्योंकि कारखाना और कंपनियों को तकनीकी ज्ञान और प्रैक्टिकल ज्ञान वाले कर्मचारियों की जरूरत अधिकतर ज्यादा रहती है इसलिए सरकार ने सरकारी कंपनियों में यह प्रावधान रखा है कि प्रशिक्षु अधिनियम रखा जाए जिसमें विद्यार्थियों को तकनीकी तथा प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जा सके इस अधिनियम में कंपनियां प्रशिक्षु से 8 घंटे काम नहीं करवा सकती हैं वे दिन में 3 से 4 घंटे काम करने के लिए कंपनियों में जा सकते हैं इसके लिए उन्हें कुछ स्टाइपेंड भी दिया जाता है यदि ट्रेनिंग 1 साल की है इससे कम अवधि वाले प्रशिक्षु को कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जाता है जैसे 1 महीने 2 महीने इत्यादि प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु यह सीखता है कि कार्य करते वक्त यदि किसी कार्य में कोई समस्या आ गई है तो उसको कैसे दूर करना है औजारों और मशीनों का इस्तेमाल कैसे करना है मापने वाले यंत्रों के द्वारा किसी जॉब को कैसे मापना है यह सब ज्ञान प्रशिक्षकों प्रशिक्षकों के दौरान ही दी जाती है इसका सीधा लाभ कंपनियों को मिलता है।