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Pooja Tripathi
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सल्तनत कालीन भक्ति आंदोलन
भक्ति आंदोलन,__सल्तनत काल में अनेक साधु संत और सुधारक हुए थे जिन्होंने भक्ति भावना के विकास पर बल दिया और धर्म सुधार का एक ऐसा नया आंदोलन चलाया जो इतिहास में भक्ति आंदोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
भक्ति आंदोलन भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण घटना है इस आंदोलन का उद्भव तुर्कों के आगमन के पश्चात भारतीय धर्म एवं समाज में व्याप्त संकीर्तन के फलस्वरूप हुआ है यद्यपि यह आंदोलन कोई नया आंदोलन नहीं था अवनीश का सूत्रपात आदि शंकराचार्य के समय से ही उनके द्वारा चलाए गए अद्वैतवाद e-darshan से हो चुका है सल्तनत काल में समाज का स्तर बहुत गिर गया था ऐसी गंभीर स्थिति को देखकर अनेक समाज सुधारक सामने आए और उन्होंने समाज एवं धर्म में सुधार हेतु अनेक आंदोलन संचालित किए
भक्ति आंदोलन के संतों में रामानुज, रामानंद ,कबीर चैतन्य महाप्रभु ,गुरु नानक, रैदास, दादू, मीराबाई, वल्लभाचार्य, नामदेव आदि के नाम उल्लेखनीय है।
इन्होंने जाति प्रथा का घोर विरोध किया इस आंदोलन का जन्म दक्षिण भारत में हुआ था परंतु धीरे-धीरे या आंदोलन समस्त भारत में फैल गया
इन्होंने व्यक्तिगत चरित्र की शुद्धता पर विशेष बल दिया था।
भक्ति आंदोलन की सभी प्रवर्तक समाज में व्याप्त निरर्थक और नंबरों की घोर विरोधी थे कर्मकांड एवं देवी देवताओं की मूर्ति पूजा का खंडन किया समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव का प्रबल विरोध किया।
भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक ओं के अनुसार से ही ईश्वर की भक्ति की जाए तो मोक्ष की प्राप्त किया जा सकता है ।
सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया गया था उनकी दशा में सुधार की ओर विशेष ध्यान दिया गया था।
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