वर्तमान परिप्रेक्ष्य -
- 19 जुलाई 2018 को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन ) बिल 2013 राज्यसभा में पारित किया गया है यह विधेयक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम - 1988 का संशोधित रूप है।
- ध्यातव्य है कि 19 अगस्त 2013 को तत्कालीन कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के मंत्री वी नारायणसामी द्वारा राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया गया था।
विधेयक के मुख्य प्रावधान -
- विधेयक में रिश्वत लेने संबंधी प्रावधान को व्यापक बनाया गया है और सजा का प्रावधान 3 से 7 वर्ष है जबकि 1988 के अधिनियम में सजा की अवधि 6 महीने से 5 वर्ष तक निर्धारित है।
- विधेयक रिश्वत देने संबंधी नए प्रावधान को शामिल करता है सजा की अवधि 3 से 7 वर्ष और साथ में जुर्माना भी है।
- विधेयक सभी प्रकार के अपराधों को उकसाना दंडनीय अपराध मानता है और सजा का प्रावधान 3 से 7 वर्ष है जबकि 1988 के अधिनियम में सिर्फ रिश्वत लेने के लिए उकसाना अपराध माना गया है।
- 1988 के अधिनियम के तहत केंद्र /राज्य सरकार की पूर्व अनुमति बिना सार्वजनिक अधिकारी पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है जबकि यह विधेयक इस प्रावधान के दायरे में अवकाशप्राप्त अधिकारियों को भी संरक्षण प्रदान करता है।
-- विधेयक रिश्वत में लिए गए धन को जब्त करने का प्रावधान करता है जब यह माना जा रहा हो कि अपराध किया गया है।