सिंधु घाटी सभ्यता

• विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है|
यह सभ्यता कम से कम 8,000 वर्ष पुरानी है।
इसका विकास सिन्धु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ|
• हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा और राखीगढ़ी इसके प्रमुख केन्द्र थे|
1826 में चार्ल्स मैसेन ने पहली बार इस पुरानी सभ्यता को खोजा|
1861 में एलेक्जेण्डर कनिंघम के निर्देशन में भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की गयी|
• लार्ड कर्जन द्वारा जॉन मार्शल को भारतीय पुरातात्विक विभाग का महानिदेशक बनाया गया|
1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन किया। इस प्रकार इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया|
•  राखलदास बेनर्जी को मोहनजोदड़ो का खोजकर्ता माना गया।
प्रथम बार कांस्य के प्रयोग के कारण इसे कांस्य सभ्यता भी कहा जाता है|
• सिन्धु घाटी सभ्यता के 1400 केन्द्रों को खोजा जा सका है जिसमें से 925 केन्द्र भारत में है|
सिंधु घाटी सभ्यता के केन्द्र-स्थल पंजाब तथा सिन्ध में था|
• हड़प्पा तथा मोहन् जोदड़ो दोनो नगरों के अपने दुर्ग थे जहाँ शासक वर्ग का परिवार रहता था|
मोहनजोदड़ो का अब तक का सबसे प्रसिद्ध स्थल है विशाल सार्वजनिक स्नानागार, जिसका जलाशय दुर्ग के टीले में है|
मोहन जोदड़ो की सबसे बड़ा संरचना है ,अनाज रखने का कोठार|
• सिन्धु सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान थी|
यहीं के निवासियों से विश्व में सबसे पहले कपास की खेती करना शुरू कियें|
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोग गेंहू, जौ, राई, मटर, ज्वार आदि अनाज पैदा करते थे|
हड़प्पा सभ्यता के लोगों का दूसरा व्यवसाय पशु-पालन था|
यहाँ के लोग धरती को उर्वरता की देवी समझते थे|
Posted on by