🔹ऊष्मा की गति पर आकृति एवं तरंग दैर्ध्य का कोई प्रभाव नहीं पड़ता|
🔹 ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य तरंग होती है|
🔹ध्वनि तरंगों पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|
🔹10 निस्पंद प्रति सेकंड की धनि को सुन नहीं सकते हैं|
🔹 ताप एवं आद्रता के बढ़ने से ध्वनि की गति बढ़ती है|
🔹 ध्वनि ठोस द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती है परंतु यह निर्वात में गमन नहीं कर सकती|
🔹 ध्वनि की गति वायु में सामान्य ताप पर 332 मी./सै. तथा स्टील में 5000 मी/सै.होती है|
🔹 इसका अवर्तन परार्वतन विवर्तन तथा व्यक्तिकरण हो सकता है|
🔹 ध्वनि का सामान्य स्तर 60 से 120 डेहसीमल होता है|
🔹 मनुष्य 20 से 20000 हर्ट्ज आवृती की ध्वनि सुन सकता है इसे श्रव्य ध्वनि कहते हैं इससे अधिक आवृत्ति का तरंगों को पराश्रव्य तथा कम आवृती की तरंगों को अवश्रव्य ध्वनि कहते हैं|
🔹1°C के ताप बढ़ने पर वायु में ध्वनि की गति 0.61 हीं./सै. बढ़ती है|