हम लोग जीवधारियों तथा समस्त निर्जीव वस्तुओं को देख तथा छू सकते हैं , परंतु जीवधारियों के के "जीवन "को ना देख सकते हैं ना छू सकते हैं। वास्तव मैं जीवन जीवधारियों के पदार्थ में उत्पन्न होने वाली एक विशेष प्रकार की ऊर्जा या सक्ती (Energy) है। अतः इसकी कोई सीधी परिभाषा नहीं की जा सकती प्यार ,घृड़ा ,मोह ,लालच ,सरलता, सुशीलता अच्छाई ,बुराई यह भी अमूर्त या भाववाची है। हम केवल इतना कह सकते हैं कि "संगठित पदार्थ या भूत द्रव्य की जैव दशा (livingness) ही जीवन है।"