कोशिका के विस्तृत अध्ययन के बाद कोशिका बाद अर्थात" जीवधारियों की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई कोशिका है", 19वीं शताब्दी में सूक्ष्मदर्शी तथा उसमें प्रयुक्त लेंसो की गुणवत्ता में सुधार के कारण कोशिका का अध्ययन संभव हो पाया। इस संदर्भ में ओपन लैमार्क एबीसी तथा मेयर का योगदान अतुलनीय रहा है। लैमार्क के अनुसार यदि किसी जीवधारी के अवयव ,कोशिकीय ऊतक नहीं हैं या कोशिकीय ऊतकों के द्वारा ना बने हो तो उस जीव का जीवन संभव नहीं है।
" कोशिका की खोज सन् 1665ई मैं रॉबर्ट हुक के द्वारा किया गया था "
रुडोल्फ विरचो ने सन 1858 में कोशिकावाद का विस्तार करते हुए बताया कि" सभी जैविक कोशिकाओं की उत्पत्ति पूर्व उपस्थित कोशिकाओं के द्वारा ही होता है(Omnis cella-e-cellula) कोशिका बाद के चित्र में एक महत्वपूर्ण था क्योंकि इसके प्रतिपादन से पूर्व अधिकांशत विज्ञानिक संवाद में विश्वास रखते थे।बाद में फ्रांस के जीव वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने अपने प्रयोग के आधार पर विरचो के द्वारा दिए गए कुछ बात का समर्थन किया ।
इस प्रकार कोशिका वाद के दो मुख्य तथ्य निम्न प्रकार हैं-
1- सभी जीवित जीवधारी एक या अनेक कोशिकाओं के द्वारा निर्मित होते हैं।
2- सभी कोशिकाओं की उत्पत्ति पूर्व उपस्थित कोशिकाओं को द्वारा ही संभव होता है।