- नाटक__रंगमंच पर अभिनय द्वारा प्रस्तुत करने की दृष्टि से लिखी गई तथा पात्र एवं समाधि पर आधारित एक से अधिक अंकों वाली दृश्य आत्मक साहित्यिक रचना को नाटक कहते हैं ।
- नाटक वस्तुतः रूपक का एक भेद है नट (अभिनेता) से संबंध होने के कारण इसे नाटक कहते हैं नाटक में ऐतिहासिक पात्र विशेष की शारीरिक एवं मानसिक अवस्था का अनुसरण किया जाता है आज नाटक शब्द अंग्रेजी ड्रामा या प्ले का पर्याय बन गया है हिंदी में मौलिक नाटकों का आरंभ भारतेंदु हरिश्चंद्र से माना जाता है द्विवेदी युग में इसका अधिक विकास नहीं हुआ ।
एकांकी___एकांकी किसी एक महत्वपूर्ण घटना परिस्थिति या समस्या को आधार बनाकर लिखा जाता है और उसकी समाप्त एक ही अंक में उस घटना के चरम क्षणों को मूर्त करते हुए कर दी जाती है हिंदी में एकांकी नाटकों का विकास छायावाद युग से माना जाता है।
जीवनी,___जब किसी महापुरुष या विख्यात व्यक्ति के जीवन की घटनाओं उसके कार्यकलापों तथा अन्य गुणों का आत्मीयता औपचारिकता तथा गंभीरता से व्यवस्थित रूप से वर्णन किया जाता है इसमें व्यक्ति विशेष के जीवन की छोटी से छोटी बात तथा बड़ी से बड़ी बात का इस प्रकार वर्णन किया जाता है कि पाठक उसके अंतरंग जीवन से परिचित ही नहीं होता वरन तादात्म्य स्थापित कर लेता है जीवनी का प्रामाणिक होना आवश्यक है यह तभी संभव है जब जीवनी कार को उस व्यक्ति के जीवन के विभिन्न स्वरूपों तथ्यों तथा घटनाओं का निजी तथा पूर्ण ज्ञान हो जीवनी में जहां एक और इतिहास जैसी प्रमाणिकता तथा तथ्य पूर्णता होती वहीं दूसरी ओर व साहित्यिक ता के तत्वों से पूरी हो पूर्ण होती है।
- आत्मकथा___यह विधा भी जीवनी के समान ही लोकप्रिय इसका लेखक सब अपने जीवन की कथा को पाठकों के समक्ष आत्मीयता के साथ रखता है यह इस संस्मरणात्मक होती है आत्मकथा लेखक अपने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों दशाओं में अपने मानसिक तथा भावात्मक विकास के कहानी कहता है उसका यह वर्णन उसके जीवन काल की परिवारिक सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में होता है वह अपने जीवन में घटी हुई महत्वपूर्ण तथा मानवीय घटनाओं का ही क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत नहीं करता वरन अपने जीवन पर पड़े हुए विभिन्न प्रभावों का भी उल्लेख करता चलता है।