हुमायूं

नसीरुद्दीन मोहम्मद हुमायूं का जन्म 6 मार्च 15 से 8 ईसवी में काबुल में हुआ था। उसकी माता महीम बेगम सिया मत में विश्वास रखती थी। हुमायूं बाबर के चार पुत्रों हुमायूं कामरान ऑस्कर तथा हिंदाल में सबसे बड़ा था। उसेउसे ही बाबर ने उसे ही बाबर ने अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। हुमायूं ने तुर्की फारसी तथा अरबी का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। उसने दर्शनशास्त्र ज्योतिषशास्त्र फलित तथा गणित का भी अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। उसे प्रशासनिक प्रशिक्षण देने के लिए बाबर ने 1528 ईस्वी में उसे ब्दखनसा का राज्यपाल नियुक्त किया। बाबर के मृत्यु के पश्चात 30 दिसंबर 15 से 30 ईसवी को 23 वर्ष की अवस्था में हुमायूं का राज्यभिषेक हुआ।

अपने पिता के निर्देश के अनुसार उसने अपने छोटे भाइयों से उदारता का व्यवहार किया और कामरान को काबुल कंधार और पंजाब की सूबेदारी स्त्री को संभल की सूबेदारी और हिंदाल अलवर की सुविधा भी प्रदान की। इस प्रकार हुमायूं ने नवनिर्मित मुगल साम्राज्य को विभाजित करके बहुत बड़ी भूल की। कालांतर में उसके भाई ही उसके विरुद्ध हो गए और उसे अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उसके शासन काल के प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं।

कालिंजर का युद्ध 1531 ईसवी- 1531 ईस्वी में हुमायूं ने बुंदेलखंड में कालिंजर के किले को घेर लिया। याया विश्वास किया जाता है कि यहां का राजा प्रताप रुद्रदेव संभवता अफगानो के पक्ष में था। मुगलों ने किले को घेर लिया किंतु हुमायूं को सूचना मिली कि अफगान सरदार महमूद लोदी बिहार से जौनपुर की ओर बढ़ रहा है तो वह कालिंजर के राजा से अपने पक्ष में संधि करके जौनपुर की ओर बढ़ गया।

चुनार का घेरा 1532 ईस्वी- अफगानों को पराजित करने के बाद हुमायूं ने शेर खा के अधीन चुनार के किले को घेर लिया। याया खेड़ा सितंबर 15321532 ईस्वी तक चलता रहा। इसी बीच गुजरात के शासक बहादुर शाह ने अपना दबाव बनाना आरंभ कर दिया हुमायूं ने चुनार के किले को जीतने की बजाए बिल्कुल नाम मात्र की अधीनता स्वीकार करने में ही संतोष कर लिया। ऐसा करना हुमायु की एक भूल थी।

चुनार से लौटने के बाद बहादुर शाह के विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाय हुमायूं ने डेढ़ वर्ष दिल्ली और आगरा में भोजन और उत्सव में नष्ट किया। 1533 ईस्वी में उसने दिल्ली में दीनपनाह नामक एक महान भवन बनाने पर भी बहुत सा धन व्यय किया ।यह भी उसकी एक भूल थी।

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