जनगणना-2011: अधिकतर मोर्चों पर अच्छे संकेत

सरकारी योजनाओं का प्रभाव का यह या फिर लोगों में आई चेतना इस भारत की जनगणना के आंकड़ों ने देश की बदलती तस्वीर प्रस्तुत की है। जनसंख्या बड़ी आवश्य है किंतु उसके बढ़ने की गति कम हुई है। नएनए जनगणना के अनुसार देश की जनसंख्या 121 करोड़ हो गई है। वैसे आंकड़े या अभी दर्शाते हैं कि देश में प्रतिदिन 50000 लोग बढ़ रहे हैं।

केंद्रीय गृह सचिव श्री जी. के पिल्लै और देश के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त श्री सी. चंद्रमौलि द्वारा जारी किए गए स्वतंत्रता के बाद से 7 वें राष्ट्रीय जनगणना 2011 के आंकड़े बताते हैं कि इस दशक में भारत की जनसंख्या 18.1 करोड़ बढ़कर अब 1.21 अरब हो गई है। देश में पुरुषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं महिलाओं की संख्या 58. 6565 करोड़ तक जा पहुंची है। जनसंख्या में पुरुषों की संख्या 51.54 प्रतिशत और महिलाओं की संख्या 48.46 प्रतिशत है। वर्ष 2001 की तुलना में जनसंख्या वृद्धि की दर में 3.90 प्रतिशत की कमी आई है।

इस बार राष्ट्रीय स्तर पर लिंगानुपात में सुधार हुआ है। देश में   प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 933 से  बढ़कर अब 940 हो गई है। उल्लेखनीय है कि शिक्षित महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक बढ़ी है। महापंजीयक कार्यालयों के आंकड़ों के अनुसार लिंगानुपात में सबसे अधिक अंतर संघ शासित प्रदेश दमन और दीव में है, जहां प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 615 है। दादर और नगर हवेली में लिंगानुपात 775 है। वही, केरल में प्रति 1000 पुरुष पर महिलाओं की संख्या 1082 दर्ज की गई है। पुडुचेरी पुडुचेरी में लिंगानुपात 1038 है। पिछली जनगणना में 6 वर्ष से कम आयु वर्ग में लिंगानपात 927 था जो अब बढ़कर 914 हो गया है।

साक्षरता की बात करें तो अब देश में 70% जनसंख्या पढ़ना लिखना जानती है। साक्षर लोगों की संख्या में बीते एक दशक मैं 38. 8% और साक्षरता की दर में 9.2% की वृद्धि हुई है। साक्षर पुरुषों की संख्या44.42 करोड़ और साक्षर महिलाओं की संख्या33.42 करोड़ है। यहां यह उल्लेखनीय है कि बीते एक दशक में साक्षर पुरुषों की संख्या 31% वृद्धि हुई है, जबकि साक्षर महिलाओं की संख्या में 49% की।

बीते एक दशक में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि दर 25.85 प्रतिशत से कम हो कर 20%, महाराष्ट्र की 22.73 से  कम होकर 16 % हो गई है।

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