प्रमस्तिष्क ही हमारी समस्त बुद्धि इच्छा शक्ति एवं आर्थिक गतिविधिओं ज्ञान विद्वता से स्तिमृति वाणी तथा चिंतन का केंद्र होता है ।अतः हमें पढ़ने ,लिखने बोलने ,हिसाब लगाने ,सोचने, समझने भविष्य नियोजन तथा नई नई खोजों और नए अविष्कारों की क्षमता प्रदान करता है । इसके अतिरिक्त प्रमस्तिष्क हंसने ,रोने, मूत्र त्याग,मल त्याग आदि कई प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण करता है। इसके श्वेत द्रव्य के तंत्रिका तंत्र से मस्तिष्क के अन्य सभी भागों तथा सुषुम्ना से जोड़ते हैं। श्वेत दर्द की गहराई में तंत्रिका कोशिकाओं के कोशिका का यो अर्थात धूसर द्रव्य की कई जोड़ीदार समूह अर्थात केंद्र पाए जाते हैं इन्हें आधारित कहते हैं प्रत्येक प्रमस्तिष्क गोलार्ध के अधिकांश अध्यापकों को सम्मिलित रूप से कार्पस प्रियतम कहते हैं यह हमारी कुछ पता होने वाली और त्रुटिपूर्ण पतियों से संबंधित दीक्षित पेशियों के कार्यों का नियंत्रण एवं नियमन करते हैं चेतना तथा स्मृति पर मस्तिष्क की क्षमता होती है जो अन्य कभी कार्यों को प्रभावित करती है वातावरण इन परिवर्तनों की संवेद सूचनाओं को प्राप्त करने पर मस्ती स्किन की व्याख्या करता है और फिर युक्त प्रतिक्रियाओं का समन्वय करता है यह प्रमस्तिष्क की चेतना पता होती है इसलिए अचेतन दशा जैसे कि नींद में हम वार्तावली नेताओं के परिवर्तन से अनभिज्ञ रहते हैं और चेतन प्रतिक्रियाएं नहीं होती हैं