बाबर

जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का जन्म 1483 ईस्वी में मध्य एशिया के एक छोटे से राज्य फरगना में हुआ। वह तैमूर और चंगेज खा का  वंशज था। जब वह 11 वर्ष 4 मार्च का ही था उसके पिता उमर शेख मिर्जा का देहांत हो गया तथा बाबर राजा बना। उसके चाचा और चचेरे भाइयों ने उसकी तरुण अवस्था और अनुभवहीनता का लाभ उठाकर उस पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया। 1497 ईस में बाबर ने समरकंद जीता। उसकी अनुपस्थिति मैं उसके मंत्रियों ने षड्यंत्र रच कर उसके छोटे भाई जहांगीर को फरगना का शासक बना दिया। जब बाबर फरगना को प्राप्त करने समरकंद में चला तो समरकंद पर उसके चचेरे भाई अली ने अधिकार कर लिया। अतः फरवरी 1498 ईस्वी में बाबर को 1 वर्ष से अधिक समय तक खानाबदोश वाला जीवन व्यतीत करना पड़ा। 1499 ईसवी में फरगना की राजधानी पर पुणे अधिकार  कर लिया। 1580 ईसवी में उसने समरकंद पर भी उसने अधिकार कर लिया किंतु कुछ लोगों ने उसे समरकंद छोड़ने पर बाध्य कर दिया। उसी वर्ष फरगना भी उसके हाथ से निकल गया और एक बार फिर से 1502 ईसवी में बाबर के पास कुछ भी ना रहा।

उसने आप कहीं और भाग्य आजमाने की ठानी और 1502 ईस्वी में वह काबुल पर अधिकार करने में सफल हो गया। फिर उसने कंधार व हेरात पर भी विजय प्राप्त की। शिवानी की मृत्यु के पश्चात 1516 ईसवी में बाबर ने एक बार फिर समरकंद पर विजय प्राप्त की किंतु यह विजय स्थाई सिद्ध ना हुई। 1507 ईस्वी में उसने अपने पूर्वजों की उपाधि मिर्जा को त्यागकर बादशाह की उपाधि धारण की। अब बाबर ने भारत की ओर ध्यान दिया। 1519 ईस्वी में बाबर ने भेरा, खुशाब और चेनआब के प्रदेशों पर विजय प्राप्त की। 1520 ईस्वी में उसने कई शहर जीतने के बाद हुमायूं के  हवाले कर दिया तथा 1522 ईस्वी में कंधार को जीतकर कामरान को सौंप दिया। 1524 ईस्वी में बाबर ने लाहौर को जीतकर सुल्तान इब्राहिम लोदी के चाचा अलाउद्दीन को सौंप दिया किंतु अलाउद्दीन को दौलत खान लोदी ने काबुल भगा दिया।

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