कश्मीर का इतिहास ( 800ई.-1200ई. )

कश्मीर में चार वंश ने शासन किया जो निम्न है -

1- कार्कोट वंश

2- वर्धन वंश

3- उत्पल वंश

4- लोहार वंश

कश्मीर के हिंदू राज्य के विषय में जानकारी कल्हण की राजतरंगिणी से मिलती है।

1- कार्कोट वंश -

सातवीं शताब्दी में दुर्लभ वर्धन ने इस वंश की स्थापना की थी। ह्वेनसांग के विवरण के आधार पर कहा जाता है। कि इस राज्य के सीमा के अंतर्गत तक्षशिला, पुंछ, सिहपुर, राजपूताना इत्यादि शामिल था।

दुर्लभक ( 632ई.-682ई. )-

इसने प्रतापादित्य की उपाधि धारण किया। इसने प्रतापपुर नगर अपने नाम पर स्थापित किया था। इसके 3 पुत्र हुए, जिन्होंने क्रम से कश्मीर पर शासन किया-

1- चन्द्रपीड़

2- तारापीड़

3- ललितादित्य मुक्तापीड

ललितादित्य-

यह कार्कोट वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था। इसी के शासनकाल में कश्मीर के सूर्य मंदिर अर्थात मार्तंड मंदिर का निर्माण करवाया गया था।यह धार्मिक दृष्टिकोण से भी उदार था। उसने बौद्ध मठों के निर्माण की भी आज्ञा दिया था। 733ई. मुक्तापिण्ड ने चाइना में अपना दूध मंडल भेजा था। इसने मालवा के शासक यशोवर्मन को एक युद्ध में पराजित किया था।

वर्धन वंश की इतिहास में कोई जानकारी नहीं मिलती है।।।।

3- उत्पल वंश -

इस वंश की स्थापना मंत्र अवन्ति वर्मन के द्वारा किया गया था। इसने 855 से लेकर 883 ईस्वी तक शासन किया। अवन्ति वर्मन कृषि कार्य के विकास हेतु अभियंता सुय्या निरीक्षण में कई नहरों का निर्माण करवाया। इसमें कश्मीर में अवन्तिपुर नामक नगर की स्थापना किया था। इस के दरबार में रत्नाकर और आनंद वर्धन जैसे विद्वान भी निवास करते थे। 

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