मध्यकालीन में महिलाओं की स्थिति

इस्लाम में भी मानव समानता को स्वीकार किया गया है। तथा सभी मुसलमानों को समान अधिकार दिए गए हैं। मोहम्मद साहब ने स्त्री और पुरुष को समान स्वीकार किया है कुरान में महिलाओं को सम्मान दिया गया है। इस्लाम के उद्भव के पूर्व अरब में महिलाओं की दयनीय स्थिति थी तथा परिवार में पुत्री का जन्म अशुभ माना जाता था ।तथा कुछ लोग पुत्रियो की हत्या कर देते थे परंतु पैगंबर साहब ने महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार की घोर निंदा की तथा समान अधिकार की वकालत की।

मुसलमानों के आगमन के पूर्व भारतीय समाज में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के आधार सीमित थे। वे जन्म से लेकर मृत्यु तक पुरुषों के संरक्षण में रहती थी ।भारतीय महिलाओं की स्थिति में मुस्लिम महिलाओं की स्थितियों को प्रभावित किया। इस समय मुस्लिम महिलाओं की स्थिति में भी गिरावट आई तथा शासकों के राज महल में बहु विवाह का प्रचलन बढ़ा।

दयनीय स्थिति होने के बाद भी कुछ महिलाओं ने विकास संबंधी अन्य कार्य किए जो निम्न है।

रजिया सुल्ताना ने प्रथम मुस्लिम शासिका होने का गौरव हासिल किया। उनकी पत्नी हमीदा बानो बेगम एक बुद्धिमान महिला थी। जिन्होंने हुमायूं और अकबर को परामर्श देने का कार्य किया था। जहांगीर की पत्नी नूरजहां थी राजनीति में विशेष भूमिका उनकी रहती थी। शाहजहां की बड़ी पुत्री जहांआरा बेगम ने शासन कार्य में पिता का सहयोग दिया था। जहांआरा बेगम उच्चकोटि की कवित्री थी वह मख़्ति उपनाम से कविता लिखती थी।

नूरजहां की मां अस्मत बेगम ने गुलाब के फूल से इत्र का निर्माण किया था इस समय समाज में अनेक प्रथा मौजूद थे जो निम्नलिखित हैं।

पर्दा प्रथा::

मुसलमानों के आगमन के पूर्व भारत में पर्दा प्रथा का अभाव था हिंदू स्त्रियां केवल घुंघट के द्वारा ही अपने मुंह को ढका करती थी। फिरोजशाह तुगलक ने पर्दा प्रथा का बढ़ाया और दिल्ली में यह स्थित बाहर मजारों पर स्थित महिलाओं का जाना प्रतिबंधित कर दिया था ।बादशाह अकबर भी पर्दा प्रथा का प्रचलन करवाया बदायूनी के अनुसार यदि कोई हुई थी बिना पूर्व का यह बिना पर्दा किए सड़कों या बाजारों में घूमती हुई पाई जाती है तो उनको वेश्यालय भेज दिया जाता था ।इस समय कोई भी स्त्री पर्दा प्रथा का पालन नहीं करती थी तो उसका पति उसे तलाक दे दिया करता था। रजिया और नूरजहां ने पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया।

सती प्रथा::

हिंदू समाज में पति के मृत्यु के बाद उसकी पत्नियां अपने पति के साथ जल मरती थी जिसे सती प्रथा कहा जाता था।

जौहर प्रथा::

यह प्रथा राजपूतों में प्रचलित थी जब महिलाओं के प्रति युद्ध क्षेत्र मारे जाते थे तब वह महिलाएं घर में चिता जला कर आत्मदाह कर लेती थी। इसे ही जौहर प्रथा कहा गया है। तैमूर लंग के आक्रमण से बचने के लिए राजस्थान के मुस्लिम महिलाओं ने भी जौहर प्रथा का पालन किया था।

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