सूफीवाद की शाखाएं (चिश्ती शाखा)

13वीं शताब्दी के अंत तक 14 सूफी सिलसिला स्थापित हुए ।प्रत्येक सूफी शाखा ने अपने को सुरक्षित रखने का प्रयास किया। भारत में यह शाखा निम्नलिखित है।

चिश्ती शाखा::

इस शाखा की स्थापना ख्वाजा अबु अब्दाल चिश्ती के द्वारा किया गया था। इस शाखा को भारत में फैलाने का श्रेय ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने किया ।मोइनुद्दीन चिश्ती के गुरु का नाम ख्वाजा उस्मान हारुनी था। 1190 ईस्वी में मोइनुद्दीन चिश्ती भारत आए तथा कुछ समय के लिए लाहौर में भुज गिर के खानकाह में रुके थे।

मोइनुद्दीन चिश्ती लाहौर फिर वहां से दिल्ली फिर दिल्ली से अजमेर में पहुंचे। अजमेर में मोइनुद्दीन चिश्ती के बढ़ते हुए प्रभाव को देखते हुए पुरोहित वर्ग ने मानते हुए कहा कि इन्हें राज्य से निष्कासित कर दिया जाए ।अजमेर से निष्कासित करने के लिए बाबा रामदेव को भेजा गया। लेकिन वह मोइनुद्दीन चिश्ती से प्रभावित हुए और उनके मुरीद शिष्य बन गए। और अपना शेष जीवन दीन दुखियों की सेवा में अर्पित कर दिया।

जयपाल जोगी ने मोइनुद्दीन चिश्ती को जादू से प्रभावित करने की कोशिश की। लेकिन असफल हो गया वह भी उनके अनुयाई बन गए और अपना नाम अब्दुल्ला रख लिया ।ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अपने खानकाह में सभा और संगीत के आध्यात्मिक पर बल दिया। और कुछ उच्च संगीतज्ञ को आश्रय प्रदान किया उनके प्रमुख शिष्य कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी हुए जिन्हें दिल्ली में सूफी संप्रदाय को प्रचार करने के लिए भेजा गया था।

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