एक माँ को सम्मान और आदर देने के लिये हर वर्ष एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मातृदिवस को मनाया जाता है। ये आधुनिक समय का उत्सव है जिसकी उत्पत्ति उत्तरी अमेरिका में माताओं को सम्मान देने के लिये हुई थी। बच्चों से माँ के रिश्तों में प्रगाढ़ता बढ़ाने के साथ ही मातृत्व को सलाम करने के लिये इसे मनाया जाता है। समाज में माँ का प्रभाव बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। पूरे विश्व के विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर हर वर्ष मातृ दिवस को मनाया जाता है। भारत में, इसे हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।
मातृ दिवस 2021 (Mother's Day
मातृ दिवस 2021 भारत में 09 मई, रविवार को मनाया गया। ये हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को पड़ता है।
मातृ दिवस क्यों मनाया जाता है (भारत में मातृ दिवस का इतिहास)

प्राचीन काल में ग्रीक और रोमन के द्वारा पहली बार इसे मनाने की शुरुआत हुयी। हालाँकि, ‘ममता रविवार’ के रुप में यूके में भी इस उत्सव को देखा गया था। मातृदिवस का उत्सव सभी जगह आधुनिक हो चुका है। इसे बेहद आधुनिक तरीके से मनाया जाता है ना कि पुराने वर्षों के पुराने तरीकों की तरह। अलग-अलग तारीखों पर दुनिया के लगभग 46 देशों में इसे मनाया जाता है। ये सभी के लिये एक बड़ा उत्सव है जब लोगों को अपनी माँ का सम्मान करने का मौका मिलता है। हमें इतिहास को धन्यवाद देना चाहिये जो मातृ दिवस की उत्पत्ति का कारण था।
पूर्व में, ग्रीक के प्राचीन लोग वार्षिक वसंत ऋतु त्योहारों के खास अवसरों पर अपनी देवी माता के लिये अत्यधिक समर्पित थे। ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार, रिहिह (अर्थात् बहुत सारी देवियों की माताओं के साथ ही क्रोनस की पत्नी) के सम्मान के लिये इस अवसर को वो मनाते थे।
प्राचीन रोमन लोग हिलैरिया के नाम से एक वसंत ऋतु त्योंहार को भी मनाते थे जो सीबेल (अर्थात् एक देवी माता) के लिये समर्पित था। उसी समय, मंदिर में सीबेल देवी माँ के सामने भक्त चढ़ावा चढ़ाते थे। पूरा उत्सव तीन दिन के लिये आयोजित होता था जिसमें ढ़ेर सारी गतिविधियाँ जैसे कई प्रकार के खेल, परेड और चेहरा लगाकर स्वाँग रचना होता था।
कुँवारी मैरी (ईशु की माँ) को सम्मान देने के लिये चौथे रविवार को ईसाईयों के द्वारा भी मातृ दिवस को मनाया जाता है। 1600 इंसवी के लगभग इंग्लैण्ड में मातृ दिवस मनाने उत्सव का एक अलग इतिहास है। ईसाई कुँवारी मैरी की पूजा करते हैं, उन्हें कुछ फूल और उपहार चढ़ाते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
वर्ष 1972 में जूलिया वार्ड हौवे (एक कवि, कार्यकर्ता और लेखक) के विचारों के द्वारा आधिकारिक कार्यक्रम के रुप में यूएस में मातृ दिवस को मनाने का फैसला किया गया था। जून के दूसरे रविवार को मातृ शांति दिवस और 2 जून को मनाने के लिये एक शांति कार्यक्रम के रुप में उन्होंने मातृ दिवस की सलाह दी थी।
अन्ना जारविस, यूएस में मातृ दिवस (मातृ दिवस की माँ के रुप में प्रसिद्ध) के संस्थापक के रुप में जाने जाते हैं यद्यपि वो अविवाहित महिला थी और उनको बच्चे नहीं थे। अपनी माँ के प्यार और परवरिश से वो अत्यधिक प्रेरित थी और उनकी मृत्यु के बाद दुनिया की सभी माँ को सम्मान और उनके सच्चे प्यार के प्रतीक स्वरुप एक दिन माँ को समर्पित करने के लिये कहा।
आज के दिनों में, ये कई देशों में मनाया जाता है जैसे यूके, चाईना, भारत, यूएस, मेक्सिको, डेनमार्क, इटली, फिनलैण्ड, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया, कैनेडा, जापान और बेल्जियम आदि। अपनी माँ को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिये कई सारे क्रिया-कलापों को आयोजित करने के द्वारा बहुत ही उत्साह और खुशी के साथ लोग इस दिन को मनाते हैं।