मुहम्मद गोरी का शासन काल

मुहम्मद गोरी १२वीं शताब्दी का अफ़ग़ान सेनापति था जो १२०२ ई. में गोरी साम्राज्य का  शासक बना। सेनापति की क्षमता में उसने अपने भाई ग़ियास-उद-दीन ग़ोरी (जो उस समय सुल्तान था) के लिए भारतीय उपमहादीप पर ग़ोरी साम्राज्य का बहुत विस्तार किया और उसका पहला आक्रमण मुलतान  (११७५ ई.) पर था।

मोहम्मद  गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच तराईन के मैदान में दो युद्ध हुए। ११९१ ई. में हुए तराईन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई किन्तु अगले ही वर्ष ११९२ ई. में पृथ्वीराज चौहान को तराईन के द्वितीय युद्ध में मोहम्मद ग़ोरी ने बुरी तरह पराजित किया। मोहम्मद ग़ोरी ने चंदावर के युद्ध (११९४ ई.) में दिल्ली के गहड़वाल वंश के शासक जयचंद को पराजित किया। गोरी को भेरा के खोखरैनो जिन्हें खोखर कहा जाता था पहले उन्हीने मार दिया । मोहम्मद ग़ौरी ने भारत में विजित साम्राज्य का अपने सेनापतियों को सौप दिया और वह गज़नी चला गया।

उसके शासन में कई गुलाम सेना और प्रशासन में ऊँचे पदों पर पहुँच गये थे और वे सभी मुहम्मद गोरी के लिए प्राण तक देने को तैयार रहते थे।

मोहम्मद गोरी की नजर शुरू से ही भारत की ओर थी। सबसे पहले उसने ११८६ में लाहौर को जीता और सियालकोट के किले पर कब्जा कर लिया। कहा जाता है कि इसमें उसे जम्मू के तत्कालीन हिन्दू शासक की भी सहायता मिली थी। लाहौर के बाद उसने गुजरात की ओर रुख किया, लेकिन गुजरात के राजा भीमदेव सोलंकी ने उसे बुरी तरह परास्त कर दिया। वहाँ से मुहम्मद गोरी जान बचाकर भागा और फिर कभी गुजरात की ओर मुख नहीं किया। लेकिन लाहौर को केन्द्र बनाकर भारत के विभिन्न भागों की ओर नजर गढ़ाये रहा। 

गोरी युद्ध जीतने के बाद तत्काल गजनी लौट गया था, क्योंकि वहाँ विद्रोह सिर उठाने लगा था। जाने से पहले उसने अपने एक गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को दिल्ली का सुलतान बना दिया था। उसी से गुलाम वंश चला। तभी से दिल्ली और पूरे भारत में इस्लामी राज्य की शुरूआत हुई।

Posted on by