- सुपरमून एक विलक्षण घटना है सुपरमून वास्तव में पूरे चांद को कहा जाता है जिसमें वह अपनी परिधि में पृथ्वी के सबसे पास पहुंच जाता है क्योंकि उस समय चंद्रमा अन्य दिनों के तुलना में पृथ्वी से ज्यादा निकट रहता है इसलिए यह न केवल अधिक बड़ा दिखता है बल्कि अधिक चमकता भी है।
- इस स्थिति में चांद अपने सामान्य अवस्था से 12% बढ़ा और 30% ज्यादा चमकीला दिखाई पड़ता है सुपरमून के क्रम में चांद निकट और सूर्य एक सीध में आ जाते हैं।
- उल्लेखनीय है कि सुपरमून शब्द को 30 वर्ष पहले रिचर्ड नोल्ले ने 1979 में खोज लिया था लेकिन इस शब्द का प्रचलन वर्ष 2011 से अधिक बढ़ा है।
- सुपरमून की विपरीत अवस्था को माइक्रो मून कहा जाता है हालांकि इस शब्द का व्यापक तौर पर प्रयोग नहीं होता है।
- प्रत्येक वर्ष आकार में सबसे बड़े दिखने वाले चांद को ही सुपरमून कहा जाता है इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है।