शंकर वर्मन (883 ईस्वी से 902 ईस्वी तक) -
इसने गद्दी पर बैठने के पश्चात अपने साम्राज्य का विस्तार उत्तराखंड, गुजरात इत्यादि क्षेत्रों में किया था लगातार युद्ध लड़ने के कारण धन का अभाव हो गया और उसकी पूर्ति के लिए राज्य की प्रजा पर करों का बोझ बढ़ा दिया। इस कारण यह काफी अलोकप्रिय राजा बन गया था।
गोपाल वर्मन (902 ईस्वी से 940 तक) -
इसके शासनकाल में कश्मीर में चारों तरफ अव्यवस्था और अशांति फैली थी। इसका फायदा उठाकर 939 ईस्वी में ब्राम्हण कुल में उत्पन्न यशस्कर ने कश्मीर की सत्ता ग्रहण कर लिया और उसने अपने शासनकाल में कश्मीर में पुनः शासन स्थापित किया था। यशस्कर निसंतान था इसीलिए इसकी मृत्यु के पश्चात इसके मंत्री पूर्व गुप्त ने सत्ता ग्रहण किया तथा इसके सत्ता ग्रहण करने के पश्चात उसके पुत्र क्षेमेंद्र गुप्त ने भी सत्ता ग्रहण किया 958 ईसवी में क्षेमेन्द्र गुप्त का विवाह लोहार वंश की राजकुमारी दिद्दा के साथ हुआ और विवाह के कुछ दिनों के बाद ही क्षेमेन्द्र गुप्त की मृत्यु हो गई तथा रानी दिद्दा ने 50 वर्षों तक शासन किया ।1003 में रानी दिद्दा की मृत्यु हो गई तत्पश्चात लोहार वंश का शासक और रानी दिद्दा का भतीजा ने कश्मीर के शासन पर अधिकार कर लिया।
लोहार वंश -
इस वंश की स्थापना रानी दिद्दा का भतीजा संग्राम राज ने किया । इसके शासनकाल में कश्मीर में सामंतों का विद्रोह हुआ जिसे इतनी आसानी से कुचल दिया। इसकी पत्नी रानी सुमति प्रशासन में सहयोग दिया करती थी ।इसका पुत्र कलस्य कुछ दिनों के लिए शासक बना लेकिन वह कमजोर होने के कारण साम्राज्य का विस्तार नहीं कर सका।
हर्ष -
यह कश्मीर का एक विद्वान शासक था। यह कवि एवं कई भाषाओं/विद्याओं का जानकार था। राजतरंगिणी के लेखक कल्हण हर्ष के आश्रित थे। जिसके शासनकाल में कश्मीर चारों तरफ अशांति फैल गयी लेकिन इसने राज्य को व्यवस्थित करने का प्रयास नहीं किया इसी कारण इसे कश्मीर का नीरो कहा जाता है। 1101 ईसवी में क्रोधित भीड़ ने हर्ष की महल में घुसकर इसकी हत्या कर दिया इसी कारण इसका पुत्र गद्दी पर बैठा जिसे जयसिंह कहते हैं।
जय सिंह -
यह कश्मीर के लोहार वंश का अंतिम शासक था। इसके शासनकाल में यूनानियों का कश्मीर पर आक्रमण हुआ जिसे इसने पराजित किया। इसके दरबार में कल्हण राजतरंगिणी की रचना किया। इसकी मृत्यु के साथ ही कश्मीर के हिंदू राज्य की समाप्ति हो गई।
रानी सुगंधा, देवी रानी दिद्दा तथा रानी सूर्यमति यह तीनों कश्मीर की महिला शासिका थीं।