दिल्ली और अजमेर का चौहान वंश

चौहान वंश के बारे में जानकारी चंदबरदाई कृत पृथ्वीराज रासो से मिलता है। वशिष्ठ ऋषि के माउंट आबू पर्वत (राजस्थान) में किए गए यज्ञ से चौहान वंश की उत्पत्ति मानी जाती है। चौहान वंश की अनेक शाखाएं उत्पन्न हुई जिसमें शाकंभरी के चौहान वंश ज्यादा प्रसिद्ध हुए । 7वीं शताब्दी में शाकंभरी के चौहान वंश की स्थापना वासुदेव के द्वारा किया गया। वासुदेव के बाद इस वंश में पूर्णतल, जयराज, विग्रहराज प्रथम, चंद्रराज और गोपराज जैसे शासक हुए ।लेकिन इन सभी शासकों ने सामंत की हैसियत से शासन किया।

अजयराज चौहान -

यह इस वंश का महत्वपूर्ण राजा हुआ। इसने अजमेर नगर की स्थापना की तथा यहां पर सुंदर महल एवं भवनों का निर्माण करवाया तथा इस नगर को अपनी राजधानी बनाया।

अर्णोराज -

यह अजयराज का पुत्र तथा उत्तराधिकारी था। इसके शासनकाल में सुल्तान महमूद गजनबी ने अजमेर पर आक्रमण किया तथा गजनबी को इसने पराजित किया। इसने अपने शासनकाल में पुष्कर नगर तथा पुष्कर झील का निर्माण करवाया। इसके शासनकाल में गुजरात के चालुक्य शासक कुमार पाल ने आक्रमण किया जिसमें अर्णोराज पराजित हुआ। इसके पुत्र जगदेव ने इसकी हत्या कर दी और गद्दी पर बैठा लेकिन कुछ दिनों बाद जगदेव के पुत्र ने जगदेव को हटा दिया और स्वयं गद्दी पर बैठ गया।

विग्रहराज चतुर्थ या बीसलदेव -

इसने गुजरात के चालुक्य राजा कुमारपाल को पराजित किया। इसने अपने साम्राज्य का विस्तार किया। इसके साम्राज्य का विस्तार पश्चिमी यूपी, राजस्थान (राजपूताना), पंजाब तक इसका विस्तार हुआ। इसने अपने पराक्रम के बल से शाकंभरी के चौहानों को भारत का सबसे शक्तिशाली बना दिया। यह वीर होने के साथ-साथ विद्वान भी था। इसी के द्वारा हरीकेल नाटक की रचना की गई। इसी के दरबार में महाकवि सोमदेव निवास करते थे। जिन्होंने ललित विग्रहराज नामक ग्रंथ लिखा था।विग्रहराज चतुर्थ के बाद अपारगंगेय, पृथ्वीराज द्वितीय और सोमेश्वर ने चौहान के राज्य पर शासन किया।

पृथ्वीराज तृतीय या राय पिथौरा -

यह सोमेश्वर का पुत्र और चौहान वंश का उत्तराधिकारी हुआ। इसने दिल्ली को अपने राजधानी के रूप में प्रयोग किया तथा दिल्ली में राय पिथौरा के किला का निर्माण करवाया ।पृथ्वीराज चौहान ने गुजरात के शासक भीम द्वितीय पर आक्रमण किया जो युद्ध  1182 ईस्वी में समाप्त हुआ तथा दोनों राजवंशो के बीच संधि हो गई। 1182 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान ने बुंदेलखंड में आक्रमण किया तथा यहां के शासक पमादिदेव चंदेल को आसानी से परास्त कर दिया लेकिन उनके सेनापति आल्हा और उदल से कड़ी टक्कर मिली। सीमा संबंधी विवाद को लेकर पृथ्वीराज तृतीय ने जयचंद्र को पराजित किया और बाद में उनकी पुत्री संयोगिता का अपहरण कर लिया। इसी समय मोहम्मद गोरी अपना विस्तार पंजाब में करता जा रहा था इसके कारण पृथ्वीराज 1191 ईस्वी में तराइन के प्रथम युद्ध में मोहम्मद गौरी को पराजित किया तथा 1192 ईस्वी में तराइन के द्वितीय युद्ध में मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को पराजित किया और बंदी बनाकर उनकी हत्या कर दी। पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के बाद 1193 ईस्वी में मुसलमानों का दिल्ली पर अधिकार हो गया और मुस्लिम शासन की शुरुआत हो गई।

Posted on by