मध्यकालीन भारत का समाज और उनकी परंपरा

भारत में मुसलमानों के आगमन के पूर्व हिंदू समाज में बहुत ही दयनीय स्थिति थी ।क्योंकि इनमें जाति व्यवस्था वर्ण व्यवस्था इत्यादि उग्र रूप धारण कर लिया था।

मध्यकालीन हिंदू समाज से हिंदू और मुस्लिम दो संस्कृतियों का मिलन शुरू हुआ मुस्लिम समाज को तीन वर्गों में विभाजित किया गया जाता था

1. शासक वर्ग

2. अभिजात वर्ग

3. जनसाधारण वर्ग

शासक वर्ग के अंतर्गत राजा और शाही परिवार सुल्तान बादशाह आते थे। जबकि अभिजात वर्ग के अंतर्गत उमरा वर्ग उलेमा वर्ग सूफी संत शाही दरवेश इत्यादि आते थे ।जनसाधारण वर्ग के अंतर्गत शिक्षक ,लेखक व्यापारी, ज्योतिष ,और दुकानदार आते थे तीसरे वर्ग के  राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान था।

वेषभूषा..   मध्यकालीन भारत में वेशभूषा समय और स्थान के साथ परिवर्तित एवं संशोधित होती रही है ।इस समय दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अपने सिर पर ब्लॉक किया लंबी टोपी पहनता था। सुल्तान कमीज के ऊपर लंबा कोट पहनते थे जिसे दागला कहा जाता था।

आभूषण से स्त्री और पुरुष दोनों का अनुराधा नारियों को आभूषण से अधिक लगाव था ।महिलाएं भूषण का तभी परित्याग करती थी जब यह विधवा हो जाती थी ।पुरुष दिया भूषण को धारण करते थे बादशाह जहांगीर कर लेने एक सोने की जंजीर पहनता था।

खानपान मध्यकालीन भारतीय समाज में मादक वस्तुओं के सेवन का प्रचलन अधिक था ।इस समय हिंदू और मुसलमान मदिरा, भांग, गांजा का सेवन करते थे।

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