महात्मा गांधी - 5( महिला आरक्षण एवम् पंचायती राज)


भारत सरकार ने संविधान का 73वां संशोधन विधेयक पारित कर ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के स्‍तर पर त्रिस्‍तरीय पंचायती व्‍यवस्‍था को लागू कर महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देकर गांधी जी के सपनों को साकार करने की दिशा में सकारात्‍मक कदम उठाया है। कई राज्‍यों में तो महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जा चुका है। लोकसभा और राज्‍यों की विधानसभाओं में महिला आरक्षण उसी दिशा में अगला कदम होगा। राज्‍यसभा इस विधेयक को पारित कर चुकी है और लोकसभा में भी पारित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस विधेयक के पारित हो जाने से महिला सशक्तिकरण का एक शानदार अध्‍याय शुरू होगा।

गांधी जी ने पंचायत राज के बारे में जो सपना देखा था वह साकार हो चुका है। गांधी जी ने ‘मेरे सपनों का भारत’ में पंचायत राज के बारे में जो विचार व्‍यक्‍त किये हैं वे आज वास्‍तविकता के धरातल पर साकार हो चुके है क्‍योंकि देश में समान तीन-स्‍तरीय पंचायत राज व्‍यवस्‍था लागू हो चुकी है जिसमें हर एक गांव को अपने पांव पर खड़े होने का अवसर मिल रहा है। गांधी जी ने कहा था – “अगर हिंदुस्‍तान के हर एक गांव में कभी पंचायती राज कायम हुआ, तो मैं अपनी इस तस्‍वीर की सच्‍चाई साबित कर सकूंगा, जिसमें सबसे पहला और सबसे आखिरी दोनों बराबर होंगे या यों कहिए कि न तो कोई पहला होगा, न आखिरी।” इस बारे में उनके विचार बहुत स्‍पष्‍ट थे। उनका मानना था कि जब पंचायत राज स्‍थापित हो जायेगा त‍ब लोकमत ऐसे भी अनेक काम कर दिखायेगा, जो हिंसा कभी भी नहीं कर सकती।

Source - pib

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