➡जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे|
➡ महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर हुए|
➡ महावीर का जन्म 524 ई. पू.में कुंडा ग्राम में हुआ था इनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छवी राजा चेटक की बहन थी|
➡ महावीर की पत्नी का नाम जसोदा एवं पुत्री का नाम अणोज्जा एवं प्रदर्शनी था|
➡ महावीर के बचपन का नाम वर्द्धमान था इन्होंने 30 वर्ष की उम्र में माता पिता की मृत्यु के पश्चात अपने बड़े भाई नंदिवर्धन से अनुमति लेकर सन्यास जीवन को स्वीकारा था|
➡ 12 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद महावीर को जृम्भिकताम के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे तपस्या करते हुए संपूर्ण ज्ञान का बोध हुआ और वह जिन कहलाए |
➡महावीर ने अपना उपदेश प्राकृत भाषा में दिया|
➡ स्थूलभद्र के शिष्य श्वेतांबर एवं भद्रबाहु के शिष्य दिगंबर कहलाए |
➡ जैन धर्म के त्रिरत्न है-
🔹सम्यक् दर्शन 🔹सम्यक् ज्ञान और🔹सम्यक् आचरण या चरित्र|
➡ जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है|
➡ जैन धर्म में आत्मा की मान्यता नहीं है|
➡ महावीर पूर्वजन्म एवं कर्मवाद में विश्वास करते थे|
➡ जैन धर्म में अपना आध्यात्मिक विचारों को सांख्य दर्शन से ग्रहण किया|