क्रिप्स मिशन (1942)

द्वितीय विश्व युद्ध में जब मित्र राष्ट्रों की स्थिति बिगड़ने लगी तब संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट ,चीनी राष्ट्रपति च्यांग काई शेक तथा ब्रिटेन की लेबर पार्टी के कई नेताओं ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल पर इस बात के लिए दबाव डालना शुरु किया कि युद्ध में भारतीयों का सहयोग प्राप्त करने की दिशा में प्रयास करें।

इस परिस्थिति में ब्रिटिश सरकार ने मार्च 1942 ईस्वी में अपने कैबिनेट मंत्री स्टेफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में एक दूत मंडल को भारत भेजा।

क्रिप्स मिशन ने निम्नलिखित घोषणाएं की-

युद्ध समाप्त होने पर भारत को डोमिनियन स्टेटस का दर्जा।

युद्ध के पश्चात भारतीयों का निर्वाचित निकाय भारतीयों के लिए संविधान बनाएगा। इस संविधान सभा में भारतीयों को भी सम्मिलित किया जाएगा।

एक ऐसी संविधान निर्मात्री परिषद का गठन करने का वादा किया गया जिसमें कुछ सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा किया जाना था तथा कुछ रियासतों के प्रतिनिधियों द्वारा नामांकित सदस्य होंगे।

पाकिस्तान की मांग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव में यह गुंजाइश रखी गई थी कि यदि किसी प्रांत को नया संविधान स्वीकार्य नहीं होता तो वह अपने लिए नए संविधान हेतु ब्रिटिश सरकार के साथ समझौता कर सकेगा।

हालांकि , प्रत्यक्ष रुप से पाकिस्तान की मांग को इसमें स्वीकार्य नहीं किया गया था।

कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग दोनों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया । गांधी जी ने किसे 'पोस्ट डेटेड चेक' कहा।

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