कोल इंडिया लिमिटेड देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी

सार्वजनिक क्षेत्र की  कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। 16 अगस्त 2011 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कोल इंडिया लिमिटेड के शेयर मूल्य में 2% की वृद्धि हुई और कंपनी का बाजार पूंजीकरण बढ़कर 251296 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कोल इंडिया लिमिटेड भारत की कोयला उत्पादक कंपनी है। बाजार मूल्य के संदर्भ में मुकेश अंबानी की पेट्रोलियम कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड दूसरे स्थान पर और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ओएनजीसी तीसरे स्थान पर है। R I L के शेयर में 0.55 प्रतिशत की गिरावट हुई है और कंपनी का बाजार मूल्य 247129 करोड़ रुपए रह गया। जो ओएनजीसी की बाजार मूल्य से 4000 करोड़ रुपए कम है।  आर आई लए ने पहला स्थान वर्ष 2007 में ओएनजीसी से लिया था। ओएनजीसी की बाजार पूंजी 237200 करोड़ों रुपए है। विदित हो कि कोल इंडिया लिमिटेड वर्ष 2010 मैं बाजार में सूची हुई थी और उस समय 203000 करोड़ रुपए  के बाजार पूंजीकरण के साथ देश की पांचवी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई थी।

कोल इंडिया लिमिटेड को महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया है। यह दर्जा हेतु नामित होने वाले सार्वजनिक क्षेत्र की पांचवी कंपनी है। इस आशय का प्रमाण पत्र राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 11 अप्रैल 2011 को सार्वजनिक क्षेत्र दिवस के अवसर पर सीआईएल के प्रबंध निदेशक एन सी जा झा प्रदान किया। इससे दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी सीआईएल के निदेशक मंडल को निवेश संबंधी निर्णय में अधिक स्वायत्तता मिलेगी। इसके  साथ ही एक अन्य सार्वजनिक उपक्रम नेवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड को नवरत्न तथा पवन हंस कॉर्पोरेशन को मिनी रत्न का दर्जा दिया गया है। कंपनी  को महारत्न का दर्जा मिलने के बाद संबंधित बोर्ड को 5000 करोड़ रुपए तक के पूंजीगत निवेश के बारे में पूर्ण रुप से स्वामित्व वाली सब्सिडीयरी या संयुक्त उद्यम परियोजना के लिए सरकार से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। नवरत्न कंपनियों के लिए या सीमा 1000 करोड़ रुपए तथा मिनी रत्न प्रथम श्रेणी के लिए 500 करोड़ रुपए है। नवीनतम स्थिति के अनुसार चार महारत्न कंपनियां 16 नवरत्न कंपनियों और 63 मिनी रत्न की प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी की कंपनियां हैं। 

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