देश के प्रत्येक नागरिकों को निशुल्क स्वास्थ्य देखभाल सुविधा उपलब्ध कराने हेतु योजना आयोग ने नेशनल हेल्थ इन टायिटल मेंट कार्ड उपलब्ध कराने की संस्तुति की है। इस स्कीम के तहत देश के सभी नागरिकों को निशुल्क अनिवार्य प्राथमिक द्वितीयक व तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित कराने की गारंटी प्रदान की जाएगी। इस योजना का संपूर्ण वित्तपषण केंद्र सरकार करेगी।
हालांकि सरकार उपयुक्त स्कीम के लिए धन संग्रहण हेतु सर्वाजनिक अस्पतालों में यूजर चार्ज लगाने की सोचेगी पर योजना आयोग का विशेषज् दल धन संग्रह के इस तरीके से खुश नहीं है क्योंकि उपयुक्त स्कीम के लिए अत्यधिक राशि की जरूरत होगी। फिलहाल स्वास्थ्य पर कुल लोक व्यय सकल घरेलू उत्पाद का महज 1 पॉइंट 4% है और सभी को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य पर सकल घरेलू उत्पाद का 3% व्यय करना होगा। इसके लिए योजना आयोग ने जो रास्ता सुझाया है वह है स्वास्थ्य उपकर का। ऐसा अनुमान है कि 1परसेंट के उपकर से प्रतिवर्ष 9000 करोड़ रुपए संग्रहित किए जा सकते हैं। इससे पहले भी केंद्र सरकार विभिन्न सामाजिक क्रियान्वयन हेतु उपकर अधिभार लगाती रही है। शिक्षा उपकर का उदाहरण लिया जा सकता है जिससे सरकार को 27500 करोड़ों रुपए तथा कारपोरेशन टैक्स पर अधिभार से सरकार को 15 साल करोड़ों रुपए की प्राप्ति होती है। साथ साथ ही तमाकू पान मसाला नमक इत्यादि पर भी उपकर अधिभार लगाती है। इन सारे उपकरण व अधिकारों के केंद्र सरकार को कुल 79000 करोड़ों रुपए की प्राप्ति होती है या सरकार के कुल राज्य के 8.5 प्रतिशत लगभग है।
उल्लेखनीय है कि सरकार लोगों से कर स्वराज के रूप में 1000000 करोड रुपए उघाहती है। इसके बावजूद यह पश्चिमी देशों के कुल आय के 50% के कर से कम ही है। पर भारत के विवाद यह है कि स्वास्थ्य उप कर का भार किस पर डाला जाए देश के सभी लोग पर या फिर केवल समृद्धि लोगों पर विगत 20 वर्षों के आर्थिक सुधारों से देश की समृद्धि बड़ी है। फोर्ब्स के अनुसार भारत मैं अरबपतियों की संख्या वर्ष 1990 के 1 से बढ़कर 49 पहुंच गई है। साथ ही प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद भी 503 से बढ़कर $1265 हो गई है ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि उपकर ऐसे करो पर लगाए जाएंगे जो समृद्धि द्वारा दे हो।