राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ।

उच्चतम न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ वाद 1992 में दिए गए निर्देश के अनुसरण में भारत सरकार ने 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 अधिनियमित किया। आयोग "अन्य पिछड़े वर्गों की ऐसी सूचियों में नागरिक के किन्ही वर्गों को अन्य पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल करने के अनुरोधों या शामिल करने संबंधी शिकायतों की जांच करेगा और केंद्र सरकार को, जैसा यह उचित समझे सलाह देगा।" अधिनियम की धारा 9(2) में यह उल्लेख है कि आयोग की सलाह सामान्यता केंद्र सरकार पर बाध्यकारी होगी।

         गौरतलब है कि सरकार द्वारा उक्त अधिनियम के निरसन एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने हेतु राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग निरसन विधेयक ,2017 एवं संविधान (123 वां संशोधन) विधेयक, 2017 प्रस्तावित किया गया है। संविधान में संशोधन हेतु यह निर्णय सोच का परिणाम है कि उक्त अधिनियम आयोग को अन्य पिछड़े वर्गों की शिकायतों को सुनने के लिए सशक्त नहीं करता है।

         संविधान (123 वां संशोधन) विधेयक 2017 के जरिए संवैधानिक संशोधन के लिए निम्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है-

- सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए अनुच्छेद 338 बी के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के नाम से एक आयोग गठित करने और संशोधित परिभाषा के साथ अनुच्छेद- 366 के तहत धारा- 26 सी को शामिल करने के लिए।'सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग' का तात्पर्य उन पिछड़े वर्गों से है जिन्हें इस उद्देश्य के लिए संविधान में अनुच्छेद 342 ए के तहत रखा गया है।

- ऐसा माना जा रहा है कि इस निर्णय से सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के समग्र कल्याण को बढ़ावा मिलेगा तथा अनुच्छेद 338 बी के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्य निष्पादन में निरंतरता आएगी।

केंद्र तथा राज्यों द्वारा जनसंख्या के अन्य पिछड़े वर्गों एवं अल्पसंख्यकों हेतु कल्याणकारी योजनाएं-

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC)

अल्पसंख्यकों के लिए 'सामान अवसर आयोग'

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

राष्ट्रीय धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक आयोग

भाषायी अल्पसंख्यकों हेतु विशेष अधिकारी

अल्पसंख्यकों के कल्याण हेतु प्रधानमंत्री का नवीन 15 सूत्रीय कार्यक्रम

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