सत्याग्रह का संपूर्ण देश में जबरदस्त प्रभाव पड़ा। देशभर में जन आंदोलन चल रहा था।
इस समय गांधीजी और कुछ अन्य नेताओं के पंजाब प्रवेश पर प्रतिबंध लगे होने के कारण वहां की जनता में आक्रोश व्याप्त था। यह आक्रोश उस समय अधिक बढ़ गया जब पंजाब के दो लोकप्रिय नेता डॉक्टर सतपाल एवं डॉक्टर सैफुद्दीन किचलू को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने बिना किसी कारण के गिरफ्तार कर लिया। जनता ने एक शांतिपूर्ण जुलूस निकाला। पुलिस ने जुलूस को आगे बढ़ने से रोका और रोकने मे सफल ना हो पाने के कारण आगे बढ़ रही भीड़ पर गोली चला दी।
जिसके परिणाम स्वरुप 2 लोग मारे गए। जुलूस ने उग्र रूप धारण कर लिया और कई इमारतों को जला दिया तथा साथ ही करीब पांच को जान से मार दिया। अमृतसर की इस घटना से बौखलाकर सरकार ने 10 अप्रैल 1919 को शहर का प्रशासन सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल ऑफिसर डायर को सौंप दिया। इसने 12 अप्रैल को कुछ गिरफ्तारियां करवाई। अगले दिन 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी के दिन शाम को करीब 4:30 बजे अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन किया गया। जिसमें करीब 20000 लोगों ने हिस्सेदारी की उसी दिन 9:30 बजे सभा को अवैधानिक घोषित कर दिया गया था। सभा में गांधी जी डॉ किचलू एवं सतपाल की रिहाई एवं रोलेट एक्ट के विरोध में भाषणबाजी की जा रही थी। ऐसे मैं डायर ने फौज द्वारा बाघ को घेर लिया और 3 मिनट में अंदर भीड़ को हटाने का आदेश देकर फौज को भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दे दीया। वे तब तक गोली बरसाते रहे जब तक की गोलियां खत्म ना हो गई। हजारों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा तथा अनेक लोग घायल हो गए हैं इस हत्याकांड के बाद संपूर्ण पंजाब में मार्शल लगा दिया गया और लोगों पर तरह तरह के जुल्म ढाए गए।
प्रक्रिया= पंजाब की घटनाओं से संपूर्ण देश में भय का वातावरण उत्पन्न हो गया विदेशी शासन का वास्तविक स्वरुप तथा उसकी नियत लोगों के सामने उजागर हो गई। महान कवि और मानवता वादी रचनाकार रविंद्र नाथ ठाकुर ने इस घटना के विरोध में अपने नाइट की उपाधि लौटा दी। उन्होंने घोषणा की कि वह समय आ गया है जब सम्मान के प्रतीक अपमान अपने बेमेल संदर्भ में हमारे शर्मा और पूजा करते करते हैं और जहां तक मेरा सवाल है मैं सभी विशिष्ट उपाधियों से रहित होकर अपने उन देशवासियों के साथ खड़ा होना चाहता हूं जो अपने तथाकथित कारण मानव जीवन के आयोग्य अपमान को सहने के लिए बाध्य हो सकते हैं।