संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा के अनेक समितियों तथा उप समितियों के नियुक्ति की। इनमें संघीय संविधान समिति भी शामिल थी। इनमें से कुछ समितियों के अध्यक्ष नेहरू या पटेल थे जिन्हें संविधान सभा के अध्यक्ष ने संविधान का मूल आधार तैयार करने का श्रेय दिया था। इन समितियों ने बड़े परिश्रम के साथ तथा सुनियोजित ढंग से कार्य किया और अपने बहुमूल्य प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। भारत के संविधान का पहला प्रारूप संविधान सभा कार्यालय के मंत्रणा शाखा ने अक्टूबर 1947 में तैयार किया। इस प्रारूप की तैयारी से पहले बहुत सारे आधार सामग्री एकत्रित की गई तथा संविधान सभा के सदस्यों को संवैधानिक पूर्व दृष्टांत के नाम से तीन संकलनों के रूप मैं उपलब्ध कराई गई। इन संकलनों में लगभग 7 देशों के संविधानों से मुख्य अंश उद्धृत किए गए थे।
प्रारूप समिति:-संविधान सभा ने संविधान सभा मैं किए गए निर्णय पर अमल करते हुए संवैधानिक सलाहकार बी एन राव द्वारा तैयार किए गए भारत के संविधान के मूल पाठ के प्रारूप की छानबीन करने के लिए 29 अगस्त 1947 को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के सभापतित्व में प्रारूप समिति नियुक्त की। संविधान के प्रारूप के गहन विचार विमर्श के लिए विशेष समिति का गठन किया गया। इस विशेष समिति ने संविधान के प्रारूप पर गहन विचार विमर्श के उपरांत अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की इन सिफारिशों पर पुनः प्रारूप समिति द्वारा विचार किया गया तथा पुनः 26 अक्टूबर 1948 को संविधान का प्रारूप संविधान सभा के अध्यक्ष को प्रस्तुत किया गया।
संविधान के स्वीकृति:- संविधान के प्रारूप पर खंडवार विचार 15 नवंबर 1948 से 8 जनवरी 1949 तक चला तब तक संविधान सभा 67 अनुच्छेदों पर विचार कर चुकी थी इस संविधान का प्रथम वाचन कहा जाता है जो 17 अक्टूबर 1949 को पूरा किया गया। प्रस्तावना सबसे बाद में स्वीकार की गई तत्पश्चात प्रारूप समिति ने परिणामी या आवश्यक संशोधन किए अंतिम प्रारूप तैयार किया और उसे संविधान सभा के सामने पेश किया।