प्रकाशिक समावयवता (optical isomerism)

जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र, संरचना सूत्र तथा लगभग सभी भौतिक एवं रसायनिक गुण समान होते हैं परंतु उनका समतल द्विध्रुव प्रकाश के प्रति व्यवहार भिन्न होता है, तो उन्हें एक दूसरे का  प्रकाशिक सामा समावयवी तथा इस घटना को प्रकाशिक समावयवता कहते हैं।
  • वे यौगिक ध्रुवण घूर्णक होते हैं जिनके अणु असममित होते हैं । असममित अणुओ  को विसममित अणु भी कहते हैं।
  • दर्पण प्रतिबिंब को एक दूसरे का प्रतिबिंब रूप कहते हैं। उन अणुओ  के जोड़े को जो एक दूसरे के प्रतिबिंब रूप होते हैं, प्रतिबिंब रूपी युगल कहते हैं।
  • वह कार्बन परमाणु जो 4 भीन्न परमाणु या समूह से जुड़ा होता है असममित कार्बन परमाणु कहलाता है। असममित कार्बन परमाणु को किरल परमाणु या कीरल केंद्र भी कहते हैं।
  • यदि किसी योगिक की संरचना में और सममित कार्बन परमाणुओं की संख्या n है तू उसके प्रकाशिक समावयवता की अधिकतम संख्या2^n होती है ।
Posted on by