क्रमशः ...
Day- 66
भारतीय नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1986
- इस संशोधन अधिनियम के द्वारा बांग्लादेश, श्रीलंका अथवा अन्य देशों से आने वाले शरणार्थियों के लिए नागरिकता के उपबन्ध को कड़ा बनया गया।
- इस संशोधन द्वारा प्रावाधान किया गया कि कोई भी व्यक्ति जिसका जन्म भारत में 26 नवम्बर, 1986 से पूर्व हुआ है तो उन्हें अधिकारिक रूप से नागरिकता तभी प्राप्त होगी यदि उनके जन्म के समय उनके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक था।
- इस संशोधन द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए पंजीकरण की अवधि को 6 माह से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया।
- दिसम्बर, 2003 में भारतीय संसद ने नागरिकता के सम्बन्ध मे एक नया कानून पारित किया गया जिसके आधार पर 16 देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को दोहरी नागरिकता प्रदान करने की व्यवस्था की गई। आस्ट्रेलिया, कनाडा, फिनलैण्ड, पुर्तगाल, फ्रांस, ग्रीस, आयरलैण्ड, इजराइल, इटली, नीदरलैण्ड, न्यूजीलैण्ड, पुर्तगाल, साइप्रस, स्वीडन, स्विट्जरलैण्ड, ब्रिटेन तथा अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों को इस प्रावधान का लाभ मिलेगा। ऐसे भारतीय नागरिकों सार्वजनिक नियोजन, मताधिकार तथा संवैधानिक पद पर नियुक्त जैसे मामलों को छोड़ सभी नागरिक अधिकार मिलेंगे।
मिलते है हम अगले दिन, नये अध्याय मूल अधिकार या मौलिक अधिकार विषय पर फिर आगे चर्चा करने के