1 मई 2011 को पाकिस्तान के बाद में अलकायदा के मुखिया और अमेरिका के लिए मोस्ट वांटेड आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की हत्या अमेरिकी नौसेना के सील कमांडो की टीम ने कर दी। लादेन को मारने से संबंधित ऑपरेशन 40 मिनट तक चली। वैसे अमेरिका ने लादेन के हत्या के पश्चात इस्लामी लोगों की प्रतिक्रिया के मद्देनजर कुछ सदैव शब्दों में इसकी घोषणा की। अमेरिका ने लादेन के खिलाफ ऑपरेशन को इस्लाम के खिलाफ युद्ध के बजाय मुस्लिमों का सबसे बड़ा हत्यारा के खिलाफ ऑपरेशन का स्वरूप प्रदान किया। साथ ही मुस्लिम जगत में लाभ लादेन की हत्या के खिलाफ आक्रोश ना फैले। इसके लिए लादेन का अंतिम संस्कार समुद्र में ही कर दिया गया और उसकी तस्वीर भी जारी नहीं की गई। लादेन अफगानिस्तान और पाकिस्तान में चले रहे अमेरिकी आतंक के खिलाफ युद्ध का सबसे बड़ा निशाना था।
उल्लेखनीय है कि 29 अप्रैल 2011 को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीआईए को ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर के तहत ओसामा के निजी आवास पर छापा मारने की अनुमति दी थी छापा मारने के पूर्व पाकिस्तानी सरकार या उसके अधिकारियों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। ओसामा की हत्या की खबर ओबामा को जेरोनिमो एकिया नामक कोर्ट से दी गई। यहां ध्यान वह है कि ओसामा की छुपने की जगह तक पहुंचने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ओसामा के कुरियर की 4 साल तक जांच की। जगह की सही पहचान होने के बाद ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। ओसामा की जहां हत्या की गई वह जगह यानी एबटाबाद ,पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से महज 35 मील रेंज में स्थित है। एबटाबाद मैं पाकिस्तान सेना का अड्डा है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर या आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान की सरकार आईएसआई और पाकिस्तानी सेना को ओसामा के ठिकाने की पूर्ण जानकारी थी। हालाकि पाकिस्तान ने इस वैश्विक खुफिया एजेंसियों की असफलता बताया तथा बिना उसकी जानकारी के पाकिस्तान में किए गए ऑपरेशन की निंदा की।।