ईशा पूर्व चौथी सदी में विश्व पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए यूनानियों और ईरानियों के बीच संघर्ष हुए।अंततः सिकंदर ने ईरानी साम्राज्य को नष्ट कर दिया।
हेरोडॉट्स और अन्य यूनानी लेखकों के विवरण, जिसमें भारत को अपार संपत्ति वाला बताया गया था, ने सिकंदर को भारत पर आक्रमण के लिए प्रेरित किया।
ईरान को जीतने के बाद सिकंदर काबुल की ओर बढ़ा जहां से खैबर दर्रा पार करते हुए वह 326 ई.पु . में भारत आया।
सबसे पहले उसने तक्षशिला को जीता जिसके शासक आंभी ने न केवल सिकंदर के सामने आत्मसमर्पण किया बल्कि उसका सहयोग करने का भी वादा किया।
आगे सिकंदर की लड़ाई पोरस से हुई । झेलम नदी के तट पर लड़े गए युद्ध को वितस्ता का युद्ध या हाईडेस्पीज के युद्ध के नाम से जाना जाता है।
यद्यपि सिकंदर ने पोरस को पराजित किया था किंतु उसकी बहादुरी से प्रभावित होकर सिकंदर ने उसका राज्य उसे वापस लौटा दिया।
इससे आगे कई कारणों से सिकंदर की सेना आगे नहीं बढ़ पाई जिसमें एक महत्वपूर्ण कारण था- मगध पर शक्तिशाली नंदों का शासन होना।
सिकंदर के साथ निरयाकस, आनेसिकृटस और आनृष्टोबुलास जैसे लेखक भी आए जिन्होंने भारत के विषय में अपने विचारों को लिपिबद्ध किया जो कि इस काल के इतिहास निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी है।
बेबीलॉन में सिकंदर की मृत्यु हो गई इसके पूर्व उसने विजित भारतीय प्रदेशों को अपने सेनापति फिलिप को सौंप दिया था।