भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो )ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान पीएसएलवी - सी - 1 के माध्यम से चंद्रयान प्रथम का 22 अक्टूबर , 2008 को चंद्रमा की कक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित किया । इस अभियान में भारत निर्मित मानवरहित अंतरिक्ष यान मून इंपैक्ट प्रोब को चंद्रमा की सतह पर उतारा गया । चंद्रयान प्रथम एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर , मिनियेचर सिंथेटिक अप्रेचर रडार , मून माइनर्लॉजी मैपर ( M-3 ) आदि कुल 11 अत्याधुनिक उपकरणों से लैस पहला उपग्रह है जिसमें हाई रिजोल्यूशन रिमोट सेंसिंग के जरिए चंद्रमा की तस्वीरें देखी जा सकेंगी । यह चंद्रमा की सतह व वातावरण का संपूर्ण रासायनिक मानचित्रण करेगा तथा उसके मृदा, खनिज बर्फ , ऊष्मा ,मौसम आदि की जानकारियां उपलब्ध कराएगा। इसने चंद्रमा की भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर 1. 2 किलोमीटर लंबी गुफा या लावा ट्यूब की जानकारी भी दी है जिसका तापमान हमेशा लगभग - 20 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है। इस प्रकार यह चंद्रमा की सतह के तापमान की विषमता एवं गैलेक्टिक कास्मिक किरणों से वैज्ञानिकों का बचाव करेंगी । चंद्रयान पर नजर रखने के लिए बेंगलुरु से 40 किलोमीटर दूर ब्यालालू में " इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क सेंटर " की स्थापना की गई है । भारत के इसरो व रूस के रोस ंकोस्मास ने संयुक्त रूप से 16 अगस्त , 2009 को चंद्रयान -2 का भी डिजाइन तैयार कर लिया है । यह 2013 में प्रक्षेपित किया जाएगा तथा इसे लैंड रोवर उपकरण की मदद से चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा। सितंबर 2011 में नासा के द्वारा चंद्र मिशन ग्रेल भेजा गया , जो चंद्रमा पर की गुरुत्वाकर्षण की विभिन्नता से संबंधित आंकड़े जुटाएगा । चंद्रमा की आंतरिक संरचना के अध्ययन हेतु समर्पित यह प्रथम चंद्र मिशन है ।