स्वच्छ भारत अभियान : डब्ल्यूएचओ ने की सराहना
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 3 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ की है।
- डब्ल्यूएचओ की ओर से केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के लिए जारी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण प्रोग्रेस रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक देश में 7.9 करोड़ शौचालय बने हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक, 2 अगस्त तक देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता 89.07% तक पहुंच गई है। 2 अक्टूबर 2014 तक ग्रामीण स्वच्छता सिर्फ 38.70 फीसदी थी।
- डब्ल्यूएचओ के मुताबिक- 19 राज्य और केंद्र शासित राज्य, 421 जिले और लगभग 4.9 लाख गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया था। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में पांच साल में 10 करोड़ से अधिक टॉयलेट बनाने का लक्ष्य भी रखा गया था।
तीन लाख से अधिक लोगों को फायदा
- डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ रिचर्ड जॉनस्टन ने कहा कि अनुमान है कि 'स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)' से 2014 और अक्तूबर, 2019 के बीच तीन लाख से अधिक लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया जाएगा.
- रिचर्ड ने कहा कि 2014 में स्वच्छ भारत मिशन शुरु होने से पहले स्वच्छता नहीं होने से हर साल डायरिया के 19.9 करोड़ मामले सामने आते थे. ये धीरे धीरे घट रहे हैं और अक्तूबर, 2019 तक सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं का यूनिवर्सल इस्तेमाल पूरा हो जाने से इसका पूरी तरह सफाया हो जाएगा.
- अध्ययन में पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता सेवाओं, व्यक्तिगत स्वच्छता में सुधार का सबूत मिला जिसका सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव रहा।
2014 में हुई थी शुरुआत
- भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है, जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना है। यह अभियान महात्मा गाँधी के जन्मदिवस 02 अक्टूबर 2014 को आरंभ किया गया।
- महात्मा गांधी के सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के पास स्वयं झाड़ू उठाकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। फिर वो वाल्मिकी बस्ती पहुंचे और वहां भी साफ-सफाई की और कूड़ा उठाया। उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन बनाते हुए देश के लोगों को मंत्र दिया था, ‘ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे’।
यूनिसेफ का अनुमान
- यूनिसेफ ने अनुमान व्यक्त किया है कि स्वच्छता का अभाव हर साल भारत में 1,00,000 से भी अधिक बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार है।
- यूनिसेफ द्वारा कराए गए एक अन्य अध्ययन में यह अनुमान व्यक्त किया गया है कि भारत के किसी भी ओडीएफ गांव का हर परिवार प्रत्येक साल 50,000 रुपये की बचत करने में सफल हो जाता है क्योंकि वह बीमारी के इलाज में होने वाले खर्चों से बच जाता है और इसके साथ ही ऐसे परिवारों के सदस्यों के बीमार न पड़ने से आजीविका की बचत भी होती है।