STA- 1 में शामिल होना भारत के लिये कितना महत्त्वपूर्ण है?

अमेरिका ने भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1  (Strategic Trade Authorisation-1 ) की सूची में शामिल करते हुए इसे किये जाने वाले दोहरे उपयोग वाली उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात में छूट प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि भारत यह दर्जा पाने वाला एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है। इस सूची में शामिल होने के बाद अमेरिका से उच्च तकनीकी सामरिक उत्पादों का लेन-देन आसानी से हो सकेगा।

पृष्ठभूमि

भारत के लिये उच्च तकनीक तक पहुँच स्थापित करना, वर्ष 2008 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने के प्रमुख उद्देश्यों में से एक था, जिसे विशेष रूप से 1970 से 90 के दशक तक अस्वीकार कर दिया गया था। 
राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के अंत में अमेरिका ने भारत को "प्रमुख रक्षा सहयोगी" के रूप में मान्यता दी और अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ रक्षा सह-उत्पादन और सह- विकास के लिये समान प्रौद्योगिकी को साझा करने की प्रतिबद्धता जताई।
अगस्त 200 9 में ओबामा ने शीतयुद्ध युग की प्रथाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से यूएस निर्यात नियंत्रण प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने की घोषणा की जिसका मुख्य उद्देश्य प्रौद्योगिकियों को सोवियत संघ के हाथों में जाने से रोकना तथा अमेरिकी तकनीकी उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्द्धी बनाने के साथ ही अधिक नौकरियाँ सृजित करना था। तब से अब तक ये परिवर्तन जारी हैं।
अमेरिका में सीमित है निर्यात लाइसेंसिंग

अमेरिका ने पारंपरिक रूप से बहुत ही सीमित निर्यात लाइसेंसिंग शासन किया है। मुनिशन सूची, जिसमें रक्षा वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों को शामिल किया जाता है, को राज्य विभाग द्वारा नियंत्रित किया जाता है और वाणिज्य नियंत्रण सूची, जिसमें दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी शामिल हैं, वाणिज्य विभाग के अंतर्गत आती है।
STA-1 तथा STA-2

2011 में निर्यात नियंत्रण में सुधार के लिये पहल के रूप में अमेरिकी सरकार ने लाइसेंस मुक्त या लाइसेंस में छूट वाले शासन की ओर एक कदम बढ़ाते हुए सामरिक व्यापार प्राधिकरण (Strategic Trade Authorisation -STA) की अवधारणा लागू की तथा  इसके अंतर्गत दो सूचियाँ - STA-1 और STA-2 बनाई गईं। 
वे देश जो इनमें से किसी भी सूची का हिस्सा नहीं हैं उन्हें वाणिज्य नियंत्रण सूची (दोहरे उपयोग की वस्तुओं वाली) के प्रत्येक आइटम के लिये लाइसेंस प्राप्त करने हेतु आवेदन करना पड़ता है। 
STA-1 और STA-2 ने उन लोगों के बीच एक पदानुक्रम स्थापित किया जिन्हें अमेरिका "अच्छे देशों" (जो दुनिया में "प्रसार" की दिशा में योगदान नहीं देते थे) के रूप में प्रमाणित करने का इच्छुक था।
STA-1 सूची में 36 देश (इसमें नाटो सहयोगी और द्विपक्षीय संधि सहयोगी जैसे- जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं) हैं, जिनके अप्रसार नियंत्रण को अमेरिका दुनिया में सबसे अच्छा मानता है। 
उल्लेखनीय है कि ये सभी देश चारों बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण प्रणालियों- परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG), मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR), ऑस्ट्रेलिया समूह और वासनेर व्यवस्था का भी हिस्सा हैं। 
STA-1 में शामिल देशों (अमेरिका के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों) को लगभग 90% दोहरी उपयोग तकनीक के लिये लाइसेंस मुक्त पहुँच प्राप्त है और ये सभी देश राष्ट्रीय सुरक्षा, रासायनिक या जैविक हथियार इत्यादि के कारणों को नियंत्रित करने के लिये पात्र हैं भले ही प्रौद्योगिकी या वस्तु क्षेत्रीय स्थिरता या अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करे। 
STA-2 सूची में शामिल देशों को केवल कुछ मामलों में लाइसेंस छूट प्राप्त है लेकिन वे दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं/प्रौद्योगिकी प्राप्त नहीं कर सकते जो क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं, या परमाणु अप्रसार आदि में योगदान दे सकते हैं। 
STA-1 में शामिल होने से पहले, भारत STA-2 सूची में (सात अन्य देशों - अल्बानिया, हॉन्गकॉन्ग, इज़राइल, माल्टा, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ताइवान के साथ) शामिल था।
यहाँ कुछ बिंदुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है: 
  1. बहुत से देश STA-1 और STA-2 दोनों सूचियों से बाहर हैं और विशिष्ट लाइसेंस के बिना अमेरिका की उच्च तकनीक तक पहुँच प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
  2. अल्बानिया नाटो का एक सदस्य है इसके बावजूद STA-2 में शामिल है।
  3.  इज़राइल, एक प्रमुख अमेरिकी सहयोगी, STA -1 में शामिल नहीं है। 
  4.  फिलीपींस, एक और प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी इनमें से किसी भी सूची में शामिल नहीं है। 
  5.  चीन और पाकिस्तान भी इनमें से किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं। 
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