भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2018-20 के लिए कुल 325 करोड़ रुपये की लागत से ‘सेवा भोज योजना’ नामक नई योजना शुरू की है।
इस योजना के तहत भोजन,प्रसाद,लंगर (सामुदायिक रसोई)भंडारे के लिए घी,तेल,आटा, मैदा,रवा, चावल, दाल, चीनी, बुरा,गुड जैसी कच्ची सामग्री की खरीदारी पर केन्द्रीय वस्तु और सेवाकर (सीजीएसटी) और एकीकृत वस्तु और सेवाकर (आईजीएसटी) का केन्द्र सरकार का हिस्सा लौटा दिया जाएगा
यह योजना ऐस धार्मिक संस्थाओं पर लागू होती है, जिनके द्वारा कम से कम पिछले 3 वर्षो से एक कैलेंडर माह में कम से कम 5000 व्यक्तियों को प्रसाद, लंगर, भंडारा के रूप में मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा हो।
सभी पात्र संस्थानों का दर्पण पोर्टल में पंजीकरण आवश्यक है। मंत्रालय को प्राप्त हुए सभी आवेदनों की जांच चार सप्ताह के भीतर इस उद्देश्य से गठित समिति द्वारा की जाएगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय में सक्षम प्राधिकारी ऊपर बताई गई विशेष सामग्रियों पर सीजीएसटी और आईजीएसटी का केन्द्र सरकार का हिस्सा वापस लौटाने के लिए परोपकारी धार्मिक संस्थानों का पंजीकरण करेगा।
श्रद्धालुओं को बगैर किसी भेदभाव के निशुल्क भोजन, प्रसाद,लंगर(सामुदायिक रसोई),भंडारा प्रदान कराने वाले परोपकारी धार्मिक संस्थानों का वित्तीय बोझ कम हो सकेगा।