नागर स्थापत्य शैली

स्थापत्य कला शैली का विकास हिमालय से लेकर विंध्य क्षेत्र तक हुआ नागर स्थापत्य मुख्यता नीचे से ऊपर की स्थिति तक आयताकार निर्मित होता है। अनुप्रस्थिका तथा ऊपर की ओर उत्कर्ष इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं ।शैली के नियोजन में आयताकार मानचित्र के दोनों पक्षों में क्रमिक रूप से निकला हुआ बाहरी भाग प्रतीत होता है नागर स्थापत्य के कुछ अन्य विशेषताएं निम्न रूप में  हैं -

1. नागर शैली में शिखर अपनी ऊंचाई के क्रम में ऊपर की ओर उत्तरोत्तर पतला होता जाता है।

2. सीकर के नियोजन में बाहरी रूपरेखा बड़े स्पष्ट तथा प्रभावशाली ढंग से उभरती है अतः इसे रेखा शेखर भी कहते हैं।

3. आयताकार मंदिर के हर तरफ रितिका तथा अनेक अस्रों (बाहर क्यों निकलते हुए घोड़ों का नियोजन) होता है।

4. शिखर पर आमला की स्थापना होती है।

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