सार्वजनिक उपक्रम समिति:-
इस समिति का गठन 1964 में कृष्ण मेनन समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया शुरुआत में इसमें 15 सदस्य (10 लोकसभा + 5 राज्यसभा ) से थे किंतु 1974 में इनकी सदस्य संख्या बढ़ाकर 22 (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा ) कर दी गई।
इस समिति का कार्यकाल 1 वर्ष होता है इस समिति का अध्यक्ष केवल लोकसभा से चुना जाता है व इसके सदस्यों का चुनाव एकल संक्रमणीय पद्धति से होता है । प्रत्येक वर्ष इस समिति के 1/5 सदस्य अवकाश ग्रहण कर लेते है तथा उनके स्थान पर नए सदस्य निर्वाचित होते है । इस समिति का कार्य सरकारी उपक्रमों के लेखो का परिक्षण करना है ।
प्रवर समिति:-
यह सभी समितियों में सर्वाधिक प्रमुख समिति है इसका गठन किसी विधेयक पर विचार विमर्श हेतु उसी सदन में किया जाता है (या तो लोकसभा में या राज्यसभा में) तथा इसमें विधेयक के विषय से संबंधित कुछ विशेषज्ञ सदस्य अनिवार्य रूप से होते है । समिति द्वारा अन्य विशेषज्ञ लोगो को उनके विचार जानने हेतु आमंत्रित किया जाता है।
विशेषाधिकार समिति:-
इस समिति को संसद सदस्यों को प्राप्त उन्मुक्तियों के हनन का मामला इस समिति को सौपां जाता है । इस समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लोकसभा के प्रारंभ में अथवा समय-समय पर किया जाता है । इस समिति में लोकसभा में 15 सदस्य व राज्यसभा में 10 सदस्य होते है ।
विशेषाधिकार समिति सौपें गए प्रत्येक प्रसंग की जाँच करेगी तथा इन तथ्यों के आधार पर यह निर्णय करेगी की किसी विशेषाधिकार का उल्लंघन हुआ है या नहीं यदि हुआ है तो उसका स्वरुप क्या है और किन परिस्थितियों में हुआ है ।
सलाहकार समिति:-
इस समिति की अधिकतम सदस्य संख्या 30 व न्यूनतम सदस्य संख्या 10 होती है । यह समिति केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से जुड़ी होती है तथा इसमें दोनों सदनों के सदस्य होते है। इस समिति का गठन प्रत्येक आम चुनावों के बाद किया जाता है और लोकसभा भंग होने के साथ यह स्वत: समाप्त हो जाती है ।
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